
समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
पहले खुद गोल्ड लोन लेकर बैंक में भरोसा बनाया, फिर मजदूरों और जान-पहचान वालों को कर्जदार बनाया और नकली सोना गिरवी रखकर करोड़ों का लोन ले लिया। एक गहने की शुद्धता पर शक होने के बाद शुरू हुई जांच में 23 करोड़ 31 लाख रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है।
पुलिस के मुताबिक मामला ICICI बैंक की कई शाखाओं से जुड़ा है। नकली सोना गिरवी रखकर गोल्ड लोन के नाम पर 23 करोड़ 31 लाख 84 हजार 752 रुपये की ठगी की गई। धंतोली थाने में 30 मार्च 2026 को केस दर्ज हुआ है और अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
एक गहने से कैसे खुला राज?
18 अक्टूबर 2025 को नियमित ऑडिट में एक लोन अकाउंट में रखे गए सोने की शुद्धता पर शक हुआ। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ा। पहले शिकायत में नुकसान 23 करोड़ 19 लाख रुपये बताया गया था, जो जांच में बढ़कर 23 करोड़ 31 लाख से ज्यादा निकला।
पुलिस ने मनीषनगर, मेडिकल चौक, नरसाला, काटोल रोड, अजनी चौक, छत्रपति चौक, वर्धा रोड, प्रतापनगर और नंदनवन शाखा के 152 गोल्ड लोन खातों की जांच की। बैंक रिकॉर्ड, KYC दस्तावेज, CCTV फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल और लेन-देन खंगाले गए।
भंगार व्यापारी ने क्या किया?
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी सचिन राऊत भंगार का कारोबार करता है। उसने 2018-19 में अपने नाम पर गोल्ड लोन लेकर बैंक में साख बनाई। उसके बाद अपने कामगारों और अन्य लोगों के नाम पर लोन लिए गए। आरोप है कि कुछ बैंक अधिकारियों ने अलग-अलग शाखाओं से लोन दिलाने में मदद की।
नकली सोना असली कैसे बना?
मूल्यांकनकर्ता नंदू खरवड़े पर आरोप है कि उसने 155 नकली गहनों को असली बताकर रिपोर्ट दी। इसके लिए उसे हर रिपोर्ट पर 5 हजार रुपये मिले। उसने अपने परिचितों, दोस्तों और रिश्तेदारों सहित 38 लोगों को कर्जदार के तौर पर पेश किया। लोन की रकम खाते में आते ही दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी। पुलिस का यह भी आरोप है कि तीन ऑडिटरों ने भी नकली गहनों को शुद्ध सोना बताने के लिए पैसे लिए थे।
फिलहाल बैंक अधिकारियों, मूल्यांकनकर्ता और ऑडिटरों की भूमिका की जांच चल रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में और लोगों के नाम सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।






