


यशवंत सिंह दायमा
मंदसौर/चित्तौड़गढ़।
मालवा और मेवाड़ के अफीम उत्पादक किसानों के पैरों तले जमीन खिसकने वाली खबर सामने आ रही है! दशकों से पारंपरिक रूप से अफीम (काले सोने) की खेती कर रहे करीब 1 लाख किसानों के पट्टे पूरी तरह रद्द करने की अंदरूनी तैयारी चल रही है। सूत्रों से मिली बेहद चौंकाने वाली जानकारी के मुताबिक, अब किसानों को छोटे-छोटे टुकड़ों में पट्टे देने की व्यवस्था को हमेशा के लिए खत्म करने के मूड में है।
इस पूरी व्यवस्था को समेटकर गुजरात के एक बेहद शक्तिशाली उद्योगपति या बड़ी कॉरपोरेट फर्म की झोली में डालने की गुप्त रणनीति पर काम तेज हो गया है!
क्यों हो रहा है यह बड़ा बदलाव?:-
गंभीर सूत्रों की मानें तो सरकार का तर्क है कि किसानों द्वारा की जाने वाली बिखरी खेती के कारण अफीम और डोडा-चूरा की अंतरराष्ट्रीय तस्करी पर लगाम लगाना नामुमकिन साबित हो रहा है!
‘नशा मुक्त भारत’ अभियान के तहत प्रयोग:-
केंद्र सरकार इसे नशा मुक्ति की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा प्रयोग मान रही है। सरकार का मानना है कि जब खेती किसी एक बड़ी कंपनी के हाथ में होगी, तो कड़े सुरक्षा घेरों (Hi-Tech Security) के बीच 100% माल सीधे सरकार और फार्मा कंपनियों तक पहुंचेगा और तस्करी का खेल हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।
जमीन की तलाश शुरू: नीमच, मंदसौर और चित्तौड़ में हलचल तेज!:-?
विश्वस्त सूत्रों ने खुलासा किया है कि राजस्थान के चित्तौड़गढ़ और मध्य प्रदेश के मंदसौर-नीमच बेल्ट में 100, 200 से लेकर 300 बीघा के एकमुश्त बड़े भूखंडों (Large Land Parcels) की तलाश गुपचुप तरीके से शुरू कर दी गई है।
एकमुश्त ठेका: –
गुजरात की उस नामचीन कंपनी को एक ही जगह सैकड़ों बीघा जमीन पर आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से अफीम उगाने का ठेका दिया जाएगा।
किसानों का क्या होगा? किसानों के व्यक्तिगत पट्टे पूरी तरह समाप्त कर दिए जाएंगे। यानी जो किसान पीढ़ियों से इस खेती के भरोसे अपनी आजीविका चला रहे थे, उनका पत्ता साफ होना तय माना जा रहा है।
क्या विरोध करेंगे किसान?:-
आजीविका पर संकट: –
किसानों का कहना है कि अफीम के पट्टे उनकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
अगर केंद्र सरकार ने गुजरात के किसी कॉरपोरेट घराने को यह ठेका सौंपा होता तो किसान विरोध करेंगे, किस किस तरह से किसानों को संतुष्ट करेगी! यह आने वाला समय बताएगा!
अब देखना यह होगा कि क्या सरकार अपने इस ‘नशा मुक्त भारत’ के मास्टरस्ट्रोक को लागू कर पाती है, या फिर 1 लाख अफीम किसानों का आक्रोश इस फैसले के आड़े आ जाएगा!








