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उद्योग स्थापित कर अन्य लोगों को भी दिया रोजगार

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Screenshot 20241016 172146 Facebookसागर। वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज संवाददाता सुशील द्विवेदी। प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना का मकसद, बेरोज़गारों को स्वरोज़गार से जोड़ना है। इस योजना के तहत सागर जिले के खुरई निवासी श्री दीनदयाल दांगी को सरकार द्वारा उद्योग स्थापित करने के लिए बैंक के माध्यम से राशि स्वीकृत की गई। जिससे वे आज एक सफल उद्यमी के रूप में कार्य कर रहे है। दीनदयाल दांगी बताते है कि सागर के कृषि यंत्रों की प्रदेश के आस-पास के क्षेत्रों में अच्छी मांग को देखकर मैंने कृषि यंत्र निर्माण की इकाई स्थापित करने का निर्णय लिया। इसके लिए आवश्यक वित्तीय व्यवस्था के लिए खुरई में केनरा बैंक से संपर्क किया जहाँ बैंक प्रबन्धक ने मुझे केंद्र शासन की प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना के बारे में बताया और उन्होंने जिला व्यापर एवं उद्योग केंद्र सागर से संपर्क करने की सलाह दी। जिला व्यापार उद्योग केन्द्र में संपर्क कर योजना की जानकारी प्राप्त की और ऑनलाइन आवेदन किया। विभाग द्वारा ऋण स्वीकृति/वितरण की कार्यवाही के लिए बैंक को भेजा गया। बैंक द्वारा मुझे 25 लाख का ऋण प्रदान किया गया जिसमें प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम अंतर्गत रु. 6.25 लाख का मार्जिन मनी अनुदान प्राप्त हुआ। दांगी बताते है कि दिसम्बर 2022 में खिमलासा रोड खुरई के श्रीमंत सेठ ऋषभ कुमार वार्ड में ‘श्री गणेश इंडस्ट्रीज’ नाम से इकाई की स्थापना की थी। आज मेरे इंडस्ट्रीज सीड-ड्रिल, कल्टीवेटर, ट्राली, डिस्क हैरो आदि कृषि यंत्रों का निर्माण किया जा रहा है। श्री दांगी बताते है कि आज उनके इंडस्ट्रीज में 8 लोग काम कर रहे है और इस इकाई का लगभग टर्नओवर 40 लाख रू. है। इस इकाई के उत्पाद सागर के साथ-साथ आस-पास के जिलों जैसे दमोह, कटनी और सतना में विक्रय किये जा रहे है। उल्लेखनीय है कि सागर जिले में कृषि यंत्र विनिर्माण की 70 से अधिक इकाईयां स्थापित है। इनमें से अधिकत्तर इकाईयां खुरई, खिमलासा-बीना क्षेत्र में लगभग 20 एकड़ के निजी भू-ख्ंाडों में स्थापित है। कुछ इकाईयां शासन के आद्यौगिक क्षेत्रों में भी स्थापित है। इन इकाईयांे द्वारा कल्टीवेटर, सीड-ड्रिल, ट्राली, पंजी, प्लाउ, लेबलर, पानी टैंकर का निर्माण किया जाता है। गत वित्तीय वर्ष में इन इकाईयों द्वारा 150 करोड़ से अधिक के कृषि यंत्री का विक्रय किया गया।

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