
*धनबाद :* केंदुआ की राजपूत बस्ती में जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के रिसाव को नियंत्रित करने की बड़ी मुहिम मंगलवार से शुरू हो गई। जहरीली गैस का प्रभाव रोकने के लिए रिसाव वाले संभावित स्थानों पर बोरहोल करके नाइट्रोजन गैस फिलिंग की जा रही है।
ठंडी नाइट्रोजन गैस आग और गैस की मात्रा को कम करने में प्रभावी साबित होगी। सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
पहले टेस्ट बोरहोल केंदुआडीह राजपूत बस्ती के मस्जिद मैदान के पास करना प्रस्तावित था, लेकिन अब पुराने जीएम बंगले के पास ड्रिलिंग शुरू कर दी गई है। इसके लिए कोलकाता से 14 हजार लीटर द्रव नाइट्रोजन गैस की पहली खेप मंगलवार की सुबह धनबाद पहुंच चुकी है। आवश्यकता अनुसार अगली खेपें मंगाई जाएंगी।
*आईएसएम को मिली जिम्मेदारी*
बोरहोल और नाइट्रोजन फिलिंग का जिम्मा धनबाद के इंडियन स्कूल ऑफ माइंस (आईएसएम) को सौंपा गया है। सोमवार को कोयला भवन में सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल और निदेशक मंडल की बैठक हुई। इसमें आईएसएम, डीजीएमएस और सिफर के वैज्ञानिक भी शामिल हुए। बैठक में गैस रिसाव रोकने पर मंथन के बाद नाइट्रोजन फिलिंग को सबसे कारगर उपाय माना गया। बीसीसीएल अधिकारियों के अनुसार, आईएसएम और सीएमपीडीआईएल की रिपोर्ट में स्थिति गंभीर बताई गई है। इसे रोकने के लिए बोरहोल से ही गैस का आकलन कर काबू पाया जा सकेगा। उपायुक्त आदित्य रंजन ने बताया कि बीसीसीएल सभी औपचारिकताएं पूरी कर बोरहोल करेगी।
बताया जा रहा है कि गैस का रिसाव 13 और 14 नम्बर की सीम से हो रहा है, जहां आग लगी हुई है। 13 नम्बर की सीम की गहराई 25 मीटर और 14 नम्बर की सीम की 40 मीटर है। धनसार माइंस रेस्क्यू स्टेशन के विशेषज्ञ ड्रिलिंग और फिलिंग करेंगे। इससे गैस रिसाव को रोका जा सकेगा।
*दर्दनाक हादसे के बाद राहत की उम्मीद*
लगभग दो सप्ताह पहले केंदुआ राजपूत बस्ती और मस्जिद पट्टी में गैस रिसाव से दो महिलाओं की मौत हो गई थी। गैस से कई लोग गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं, जिनका इलाज जारी है। इस घटना ने कोल इंडिया और केंद्र सरकार को चिंतित कर दिया है। जिला प्रशासन, बीसीसीएल, सीएमआरआई और आईएसएम की टीमें राहत कार्य में जुटी हैं। प्रभावितों को सुरक्षित स्थान और अस्थायी कैंपों में ठहराया गया है। नाइट्रोजन फिलिंग से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है।








