

जबलपुर।
अनुसूचित जाति की 14 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ दुराचार के प्रयास से जुड़े एक अत्यंत संवेदनशील और गंभीर मामले में न्याय की मांग उठाने पर अखिल भारतीय इंजीनियरिंग छात्र संगठन (ESO INDIA) के शीर्ष नेतृत्व को डराने-धमकाने का प्रयास सामने आया है।
हालाँकि संगठन ने किसी भी दबाव में आए बिना संवैधानिक और कानूनी रास्ता अपनाते हुए इस कोशिश को पूरी तरह विफल कर दिया है।
प्रकरण में ESO INDIA के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण सिंह एवं पवन सिंह देवक (प्रदेश अध्यक्ष, विधि छात्र संगठन) को एक पुलिस अधिकारी के परिजन की ओर से धमकीपूर्ण लीगल नोटिस भेजा गया। नोटिस में सार्वजनिक हित में की गई शिकायत को झूठा, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक बताने का प्रयास किया गया था।
कानूनी जवाब से उजागर हुआ सच
ESO INDIA की ओर से इस नोटिस का विधिसम्मत, तथ्यात्मक और सशक्त कानूनी उत्तर प्रेषित किया गया है। जवाब में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि संगठन द्वारा की गई शिकायत—
14 वर्षीय अनुसूचित जाति की नाबालिग बालिका के साथ दुराचार के प्रयास से संबंधित है
POCSO अधिनियम एवं SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत आने वाला गंभीर आपराधिक विषय है
केवल सक्षम संवैधानिक एवं शासकीय संस्थाओं को निष्पक्ष जांच की मांग हेतु प्रस्तुत की गई थी
भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्याय की मांग के मौलिक अधिकार के अंतर्गत आती है
न्याय की आवाज़ दबाने का प्रयास
संगठन के नेतृत्व ने अपने कानूनी जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार का लीगल नोटिस न्याय की आवाज़ को दबाने, पीड़ित के पक्ष में खड़े संगठन पर दबाव बनाने और आरोपी को परोक्ष संरक्षण देने का प्रयास प्रतीत होता है, जो न केवल कानून बल्कि संविधान की मूल भावना के भी विरुद्ध है।
अवैध प्रचार से हुई मानहानि
ESO INDIA ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि संबंधित लीगल नोटिस को विधिवत प्राप्त होने से पहले ही सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में अवैध रूप से प्रसारित किया गया।
इससे संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व को मानसिक, सामाजिक और प्रतिष्ठात्मक क्षति पहुँची, जो स्वयं में कानून का उल्लंघन है।
न्याय से कोई समझौता नहीं
राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण सिंह और प्रदेश अध्यक्ष पवन सिंह देवक ने संयुक्त बयान में कहा—
“नाबालिग बच्ची और अनुसूचित समाज के अधिकारों की रक्षा करना हमारा संवैधानिक दायित्व है।
किसी भी प्रकार की धमकी, दबाव या डर हमें सत्य और न्याय से पीछे नहीं हटा सकता।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में किसी भी प्रकार की धमकी, दबाव या झूठी कानूनी कार्यवाही की जाती है, तो संगठन देश के सभी वैधानिक, संवैधानिक और न्यायिक मंचों पर मजबूती से संघर्ष करेगा।
जनता से अपील
ESO INDIA ने देश की जनता से अपील की है कि वे न्याय, संविधान और पीड़ितों के अधिकारों के साथ मजबूती से खड़े रहें, क्योंकि लोकतंत्र की असली ताकत सच के साथ खड़े नागरिकों में ही निहित होती है।










