
मीनाक्षी विजय कुमार भारद्वाज/ मुंबई
घोडबंदर हाइवे-84 बना मौत का खाई: गड्ढों का साम्राज्य और जनता बेहाल, सत्ता के गलियारों में बैठे हुक्मरान अपनी सियासत में मस्त!
मीरा-भायंदर का सबसे काला सच: एक तरफ विधायक का रुआब, तो दूसरी तरफ MBMC में 78 पार्षदों के साथ भाजपा का पूर्ण बहुमत—फिर भी गड्ढों के आगे क्यों घुटने टेक चुका है पूरा सिस्टम?
मुंबई/ महाराष्ट्र: राजधानी और मायानगरी कहे जाने वाली मुंबई शहर से सटे ठाणे जिले के मीरा भायंदर में शासन और प्रशासन के निक्कमेपन और बहरेपन पर एक बेहद करारा, सीधा और कलेजा चीर देने वाली चोट करने वाली सच्चाई घोडबंदर हाइवे-84 से सामने आ रही है। आज इस हाइवे की हालत को देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। सड़क का नामोनिशान मिट चुका है और उसकी जगह सिर्फ मौत के कुएं जैसे गहरे और जानलेवा गड्ढों ने ले ली है। हर रोज यहां से गुजरने वाले हजारों दोपहिया और चार पहिया चालक हादसों का शिकार होकर अपनी हड्डियां तुड़वा रहे हैं, गाड़ियां बर्बाद कर रहे हैं।

आम आदमी खून के आंसू रो रहा है, अपनी गाढ़ी कमाई का टैक्स ईमानदारी से भर रहा है, लेकिन इसके बदले में उसे मिल रहा है सिर्फ दर्द, धूल और जानलेवा गड्ढे। विडंबना देखिए कि जनता की इन चीखों से बेखबर, सत्ता के सिंहासन पर बैठे हमारे माननीय विधायक, मंत्री और नेतागण अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने और सिर्फ कुर्सी बचाने की गंदी राजनीति में पूरी तरह मस्त हैं। शासन-प्रशासन के मुंह पर यह किसी जोरदार तमाचे से कम नहीं है!

सत्ता के साझीदार पर लाचार तंत्र: किसकी शह पर चल रहा है यह खेल?इस विकट स्थिति ने महाराष्ट्र की राजनीति और स्थानीय निकायों के झूठे विकास कार्यों के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं:सत्ता में भागीदारी पर गहरी चुप्पी: राज्य की सरकार में एक तरफ उपमुख्यमंत्री का रसूख है, तो दूसरी तरफ विधायक और मंत्री के साथ शिवसेना भी सत्ता की मलाईदार साझीदार है। इसके बावजूद, जनता की बुनियादी जरूरत यानी एक अदद साफ और सुरक्षित सड़क देने में पूरा का पूरा प्रशासनिक अमला पूरी तरह असहाय और नतमस्तक नजर आ रहा है।MBMC का शर्मनाक कुप्रबंधन: मीरा-भायंदर महानगरपालिका (MBMC) के सियासी समीकरणों का सच किसी से छिपा नहीं है। शहर का यह सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि एक तरफ स्थानीय विधायक की धौंस है, तो वहीं दूसरी तरफ MBMC के सदन में 78 नगरसेवकों के साथ अकेले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हाथों में पूर्ण सत्ता की कमान है। नगर निगम में एकतरफा बहुमत होने के बावजूद यदि मुख्य सड़कों का यह हाल है, तो जनता यह पूछने पर मजबूर है कि आखिर इस ताकत का फायदा किसे मिल रहा है?जनता का सुलगता सवाल: फंड का रोना या नेताओं की जीहजुरी?आज घोडबंदर हाइवे के हर एक गड्ढे से आम जनता का गुस्सा बाहर आ रहा है। हर नागरिक के मन में एक ही ज्वलंत सवाल है, जिसका जवाब हुक्मरानों को देना ही होगा:


”क्या सच में मीरा-भायंदर महानगरपालिका (MBMC) के खजाने में सड़कों की मरम्मत और विकास कार्यों के लिए धन (फंड) का भारी अभाव है, या फिर बड़े नेताओं की चाटुकारिता और जीहजुरी करने में स्थानीय नेताओं के पसीने छूट रहे हैं, जिसके चलते जनता रोज तिल-तिल कर मरने को अभिशप्त है?”सड़कों की इस बदहाली और जनता की तबाही पर आंखें मूंदकर बैठने वाले राजनेताओं को यह चेतावनी साफ सुन लेनी चाहिए कि जनता का सब्र अब जवाब दे चुका है। अगर जल्द से जल्द इस हाइवे की सूरत नहीं बदली गई और गड्ढों को पूरी तरह ठीक नहीं किया गया, तो यह जनता का आक्रोश सड़क पर ऐसा तांडव मचाएगा कि सत्ता के सिंहासन हिल जाएंगे। अब सिर्फ खोखले वादे नहीं चलेंगे, जनता को हर पाई और हर नाकामी का पक्का हिसाब चाहिए!



