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पुलिस बनाम खनिज विभाग किसकी जांच सही

महीने भर का अवसर माफियाओं को मिला भरपूर अवसर

कटनी

कटनी की धरोहर कहीं जाने बाली पुरातात्विक नगरी बिलहरी में पूर्वजों के कंकालों की बेअदबी और सरकारी ज़मीन पर खुलेआम माफिया राज की खबरों ने आखिरकार जिला प्रशासन को हरकत में आने पर मजबूर कर दिया। लगातार प्रकाशित खबरों के दबाव में खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुँची, जहाँ के दौरान बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन का सनसनीखेज खुलासा हुआ। हालाँकि, पूरे मामले में बिलहरी पुलिस की भूमिका अब भी कठघरे में है, जिसने एक माह बीत जाने के बाद भी FIR दर्ज नहीं की।

खनिज विभाग की जाँच में बड़ा खुलासा

सहायक खनिज अधिकारी पवन कुशवाहा के नेतृत्व में पहुँची टीम ने उस स्थल का निरीक्षण किया, जहाँ माफिया विनोद शंकर शर्मा पर जेसीबी से कब्रें खोदने और शासकीय भूमि से अवैध खनन का आरोप है।

जाँच में सामने आया कि सरकारी ज़मीन पर भीषण अवैध उत्खनन किया गया। ज़मीन को गहराई तक खोदकर पाताल जैसा रूप दे दिया गया। मौके पर पंचनामा कार्रवाई कर अवैध खनन की पुष्टि की गई पूरी रिपोर्ट कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत की जाएगी, जहाँ से जुर्माना व वैधानिक कार्रवाई तय होगी

पुलिस बनाम खनिज विभाग किसकी जाँच सही?

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जहाँ खनिज विभाग की प्राथमिक जाँच में ही अवैध खनन स्पष्ट दिख गया, वहीं बिलहरी पुलिस पिछले एक महीने से सिर्फ पावती थमाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाले रही। सवाल यह है कि जो अवैध उत्खनन खनिज विभाग को एक नज़र में दिख गया, वह पुलिस को 30 दिन तक क्यों नहीं दिखा?

महीने भर की मोहलत माफिया को मिला खुला समय?

ग्रामीणों का आरोप है कि 23 जनवरी 2026 को लिखित शिकायत देने के बावजूद न जेसीबी जब्त की गई,न खनन रोका गया,न ही FIR दर्ज हुई। इस दौरान माफिया बेखौफ होकर कब्रों और मुक्तिधाम को खोदता रहा। पुलिस की यह सुस्ती किसी मौन समझौते की ओर इशारा कर रही है।

इन धाराओं में तत्काल दर्ज हो सकता था मामला

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, पुलिस तत्काल भारतीय न्याय संहिता (BNS) की इन धाराओं में केस दर्ज कर सकती थी—

• BNS 299 – शवों/कंकालों का अपमान

• BNS 324 – शासकीय संपत्ति को भारी क्षति

• BNS 303/305 – शासकीय भूमि से अवैध मिट्टी चोरी

• BNS 329 – आपराधिक अतिचार व अवैध कब्ज़े का प्रयास

ग्रामीणों का साफ संदेश: सिर्फ जुर्माना नहीं, जेल चाहिए

जाँच टीम के सामने ग्रामीणों ने दो टूक कहा जुर्माना तो खनिज विभाग लगा देगा, लेकिन हमारे पूर्वजों के कंकालों के अपमान का हिसाब कौन देगा? हमें FIR, गिरफ्तारी और जेल चाहिए।

पंचायत की चुप्पी भी सवालों में

ग्राम पंचायत बिलहरी की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।

सरपंच खुशबू राज नारायण सोनी और सचिव गोकर्ण मिश्रा की चुप्पी ने आक्रोश बढ़ा दिया है।

ग्रामीणों का सवाल है जब मुक्तिधाम और स्कूल का खेल मैदान खोदा जा रहा था, तब पंचायत ने प्रस्ताव पारित कर शिकायत क्यों नहीं की?

अब निगाहें कलेक्टर और पुलिस पर

खनिज विभाग की रिपोर्ट के बाद अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और पुलिस पर टिकी हैं। सवाल साफ है क्या यह मामला सिर्फ जुर्माने में दबा दिया जाएगा, या दोषियों को जेल भेजकर न्याय की मिसाल कायम होगी?

 

कटनी ब्यूरो चीफ सुरेन्द्र कुमार शर्मा

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