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*सरायपाली: जंगलबेड़ा सोलर प्लांट के विरोध में उग्र हुआ आंदोलन, कांग्रेस नेताओं ने दिया समर्थन**

*सरायपाली: जंगलबेड़ा सोलर प्लांट के विरोध में उग्र हुआ आंदोलन, कांग्रेस नेताओं ने दिया समर्थन**

**सरायपाली: जंगलबेड़ा सोलर प्लांट के विरोध में उग्र हुआ आंदोलन, कांग्रेस नेताओं ने दिया समर्थन**

तिलक राम पटेल संपादक महासमुन्द वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज चैनल समृद्ध भारत अखबार

सरायपाली। विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत जंगलबेड़ा में निर्माणाधीन सोलर प्लांट के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में एसडीएम कार्यालय के सामने ग्रामीणों द्वारा धरना-प्रदर्शन किया गया, जिसमें जिला कांग्रेस कमेटी महासमुंद के अध्यक्ष एवं खल्लारी विधायक द्वारिकाधीश यादव तथा बसना के पूर्व विधायक राजा देवेंद्र बहादुर सिंह शामिल हुए और ग्रामीणों को अपना समर्थन दिया।

जल, जंगल और जमीन की रक्षा को लेकर आंदोलन तेज

धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं, युवा और किसान शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रस्तावित सोलर प्लांट से उनकी कृषि भूमि, जल स्रोत एवं वन क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि परियोजना को लेकर उनसे पर्याप्त संवाद नहीं किया गया और बिना सहमति के कार्य प्रारंभ कर दिया गया।

प्रशासन से पारदर्शिता की मांग

 

सभा को संबोधित करते हुए विधायक द्वारिकाधीश यादव ने कहा कि जल, जंगल और जमीन पर पहला अधिकार स्थानीय निवासियों का है। यदि उनकी सहमति के बिना कोई परियोजना लागू की जाती है, तो यह उनके अधिकारों का हनन है। उन्होंने प्रशासन से परियोजना से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक करने और ग्रामीणों की आपत्तियों का समाधान करने की मांग की।

 

कांग्रेस ने दी आंदोलन को चेतावनी के साथ समर्थन

 

पूर्व विधायक राजा देवेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ग्रामीणों के अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

 

बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण रहे मौजूद

 

धरने के दौरान सरायपाली विधानसभा क्षेत्र की विधायक चातुरी नंद, कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, लेकिन ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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