

बलौदाबाजार-भाटापारा।
विश्व हिंदू परिषद एवं बजरंग दल बलौदाबाजार-भाटापारा के तत्वावधान में पलारी प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गोड़ा में विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा का भव्य एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। पूरे क्षेत्र में भक्ति, उत्साह और सामाजिक समरसता का अनुपम वातावरण देखने को मिला।
पदयात्रा के अवसर पर धर्मगुरु राजगुरु गुरु बालक दास एवं युवराज धर्मगुरु, छत्तीसगढ़ कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब सहित संत गुरु सोमेश बाबा का बजरंग दल के समस्त कार्यकर्ताओं द्वारा पुष्पमाला एवं श्रीफल भेंट कर आत्मीय व गरिमामय स्वागत किया गया। स्वागत के इस भावपूर्ण दृश्य ने उपस्थित जनसमूह के हृदय को छू लिया।
गांव की गलियों से होकर निकली पदयात्रा में धर्मध्वज, जयघोष और भजन-कीर्तन की गूंज ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। “जय श्रीराम” और “सतनाम” के उद्घोष के साथ सैकड़ों कार्यकर्ता एकजुट होकर सामाजिक एकता, भाईचारे और समरसता का संदेश देते हुए आगे बढ़ते रहे।
इस अवसर पर बजरंग दल जिला संयोजक दीपक कुमार साहू के नेतृत्व में गोड़ा एवं संडी खंड के समस्त कार्यकर्ता सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से नंदकिशोर वर्मा, कमलेश वर्मा, मनीष वर्मा, प्रवीण वर्मा, सागर वर्मा, हर्ष वर्मा, सौरभ वर्मा, नितिन वर्मा, अनुराग वर्मा, दीपक साहू, राहुल वर्मा, महेश धीवर, सुनील वर्मा, ईश्वर साहू, त्रिलोक वर्मा, आयुष वर्मा, उपेश सहित अनेकों कार्यकर्ता एवं हिंदू समाज के प्रतिनिधि तथा पंचायत प्रतिनिधिगण बड़ी संख्या में शामिल हुए।
सभा को संबोधित करते हुए धर्मगुरुओं ने सामाजिक समरसता, आपसी सद्भाव और राष्ट्रहित में संगठित रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सतनाम का मार्ग सत्य, प्रेम और समानता का मार्ग है, जो समाज को जोड़ने का कार्य करता है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनसमूह ने हिंदू एकता, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का संकल्प लिया। पदयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि यह समाज को जोड़ने, भेदभाव मिटाने और भाईचारे की भावना को सुदृढ़ करने का एक सशक्त माध्यम बनी।
ग्राम गोड़ा में आयोजित इस भव्य पदयात्रा ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि जब समाज एकजुट होकर सद्भाव और संस्कृति के संरक्षण के लिए आगे बढ़ता है, तब सकारात्मक परिवर्तन की राह स्वयं प्रशस्त हो जाती है। आयोजन के समापन पर सामूहिक प्रार्थना एवं आशीर्वचन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ, लेकिन उपस्थित जनसमूह के मन में एकता और समरसता की भावना की ज्योति प्रज्वलित होती रही।







