
इमानुएल भारद्वाज की रिपोर्ट 🖊️🖊️🖊️
मस्तूरी क्षेत्र के पाराघाट स्थित राशी प्लांट पर गंभीर आरोप लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट से निकलने वाला जहरीला पानी सीधे लीलगर नदी में छोड़ा जा रहा है, जिससे आसपास के गांवों के लोगों की सेहत और पर्यावरण पर खतरा मंडरा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार नदी का पानी पहले साफ रहता था, लेकिन पिछले कुछ समय से पानी का रंग बदल गया है और उसमें बदबू भी आने लगी है। लोगों का कहना है कि इस पानी का उपयोग नहाने, पशुओं को पिलाने और खेतों की सिंचाई में किया जाता है। यदि इसमें रासायनिक तत्व मिल रहे हैं तो इससे गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं।
इतना ही नहीं, प्लांट से निकलने वाले काले रंग के धुएं से आसपास के पेड़-पौधे भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पेड़ों की पत्तियां काली पड़ रही हैं और फसल की पैदावार पर भी असर दिखने लगा है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि प्रदूषण की पुष्टि होती है तो प्लांट प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। पर्यावरण विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर नियमित जांच क्यों नहीं की जा रही।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और आम जनता को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।
मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक दिलीप लहरिया को एक बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है।