सफेद कोट पर लगा ‘कत्ल और कलंक’ का दाग: डॉक्टर ने नर्स का गला दबाकर मारने की कोशिश की!
मसीहा' बना दरिंदा? जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर की काली करतूत, स्टाफ नर्स ने खोली पोल। मेडिकल कॉलेज में 'मर्यादा' तार-तार: डॉक्टर के गंदे इरादों का विरोध करने पर नर्स पर जानलेवा हमला।
अजीत मिश्रा (खोजी)
विशेष रिपोर्ट: मेडिकल कॉलेज की ‘मर्यादा’ वेंटिलेटर पर! डॉक्टर पर लगा नर्स की हत्या की कोशिश और छेड़खानी का आरोप, क्या सफेद कोट की आड़ में फल-फूल रहा है अपराध?
बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
- रक्षक ही बना भक्षक! डॉक्टर सौरभ गौतम पर छेड़खानी और हत्या के प्रयास का संगीन आरोप।
- प्रधानाचार्य की ‘लचर’ व्यवस्था की भेंट चढ़ी नर्स की सुरक्षा, क्या रसूख के आगे झुकेगा सिस्टम?
- बदले की आग या डॉक्टर की दरिंदगी? SC/ST एक्ट और हत्या के प्रयास के मुकदमों के बीच फंसा मेडिकल कॉलेज।
- नर्स का आरोप: “दुपट्टे से घोंटा मेरा गला”, क्या खाकी दिला पाएगी इंसाफ?
- सिद्धार्थनगर मेडिकल कॉलेज में खौफ का साया: भगवान रूपी डॉक्टर की ‘गंदी नियत’ ने किया शर्मसार।
- बस्ती की बेटी के साथ मेडिकल कॉलेज में जुल्म, सांसद जगदंबिका पाल तक पहुंची गूंज।
- बस्ती मंडल ब्यूरो रिपोर्ट: अस्पताल के बंद कमरों में ‘इंसाफ’ की चीख, सवालों के घेरे में डॉक्टर सौरभ गौतम।
बस्ती/सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर और बस्ती जिले के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने चिकित्सा जगत को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ डॉक्टर को समाज ‘भगवान’ की तरह पूजता है, लेकिन जब वही भगवान अपनी ही सहकर्मी की इज्जत और जान का दुश्मन बन जाए, तो न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। माधव प्रसाद मेडिकल कॉलेज, सिद्धार्थनगर के जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर सौरभ गौतम पर एक स्टाफ नर्स ने जो आरोप लगाए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं।
क्या है पूरा मामला?
सिद्धार्थनगर स्थित माधव प्रसाद मेडिकल कॉलेज की एक स्टाफ नर्स (निवासी बस्ती) ने जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर सौरभ गौतम पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। नर्स का दावा है कि डॉक्टर सौरभ गौतम और उनके दो साथियों—मेडिकल कॉलेज के शिवकुमार और स्टाफ नर्स स्नेहा सिंह—ने मिलकर उसे न केवल प्रताड़ित किया, बल्कि जान से मारने की कोशिश भी की।
आरोप के मुख्य बिंदु:
- अश्लील दबाव और छेड़छाड़: नर्स का आरोप है कि डॉक्टर गौतम की नियत उस पर खराब थी और वह लगातार उस पर ‘गलत काम’ के लिए दबाव बना रहे थे।
- गला दबाकर हत्या का प्रयास: नर्स ने अपनी शिकायत में उल्लेख किया है कि जब उसने डॉक्टर की बात मानने से इनकार किया, तो तीनों आरोपियों ने दुपट्टे से उसका गला कसकर उसे जान से मारने की कोशिश की।
- लूट और मारपीट: विरोध करने पर नर्स के साथ भद्दी गालियां देते हुए मारपीट की गई और इस दौरान उसका पर्स, जिसमें आधार कार्ड, नकदी और जरूरी कागजात थे, छीन लिया गया।
पूरी घटना: दुपट्टे से घोंटा गला, बचाने आए तो भाग निकले आरोपी
बस्ती की रहने वाली पीड़ित स्टाफ नर्स, जो सिद्धार्थनगर के माधव प्रसाद मेडिकल कॉलेज में कार्यरत है, ने डीआईजी (DIG) को दिए पत्र में अपनी आपबीती सुनाई है। नर्स का आरोप है कि जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर सौरभ गौतम की नियत उसके प्रति लंबे समय से खराब थी। वह अक्सर उस पर अनैतिक संबंध बनाने का दबाव डालता था।
घटना वाले दिन, नर्स का आरोप है कि डॉक्टर गौतम ने अपने साथी शिवकुमार और स्टाफ नर्स स्नेहा सिंह के साथ मिलकर उसे घेर लिया। जब नर्स ने उनकी बात मानने से इनकार किया, तो डॉक्टर और उसके साथियों ने उसे भद्दी गालियां दीं और मारपीट शुरू कर दी। हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने नर्स के ही दुपट्टे से उसका गला कस दिया, जिससे उसकी सांसें थमने लगीं। नर्स के शोर मचाने पर जब लोग इकट्ठा हुए, तब आरोपी वहां से भाग निकले। इस छीना-झपटी में पीड़िता का पर्स, आधार कार्ड और कुछ नकदी भी गायब हो गई।
डॉक्टर का पलटवार: “मुकदमे से बचने के लिए बुना गया झूठ का जाल”
इस पूरे विवाद का दूसरा पहलू भी है। आरोपी डॉक्टर सौरभ गौतम ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक “साजिश” बताया है। डॉक्टर का दावा है कि उन्होंने करीब एक माह पहले ही उक्त स्टाफ नर्स के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत नौगढ़ थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। डॉक्टर के अनुसार, नर्स ने अपनी गिरफ्तारी और कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए यह ‘छेड़खानी और हत्या के प्रयास’ की फर्जी कहानी गढ़ी है। उनका कहना है कि जिस स्टाफ नर्स ने खुद अपमानित करने के आरोप में मुकदमा झेला हो, वह अब सहानुभूति बटोरने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रही है।
सिस्टम और सुरक्षा पर उठते सुलगते सवाल
इस मामले ने मेडिकल कॉलेज की आंतरिक व्यवस्था और महिला सुरक्षा की पोल खोल दी है:
- प्रबंधन की चुप्पी: अगर कैंपस के भीतर ऐसी घटनाएं हो रही हैं, तो प्रधानाचार्य और उपप्रधानाचार्य क्या कर रहे थे? क्या उनकी लचर व्यवस्था ने आरोपियों को शह दी?
- सांसद का हस्तक्षेप: मामला इतना गंभीर हो चुका है कि स्थानीय सांसद जगदंबिका पाल ने भी इसमें दखल दिया है। नर्स का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन केवल ‘परमानेंट स्टाफ’ का पक्ष लेता है और संविदा कर्मियों या अन्य को प्रताड़ित किया जाता है।
- सुरक्षा का संकट: पत्र में एक कपड़ा दुकान के मालिक का उदाहरण देते हुए यह सवाल उठाया गया है कि अगर एक साधारण व्यापारी अपने स्टाफ की सुरक्षा के लिए लड़ सकता है, तो इतने बड़े मेडिकल कॉलेज का प्रशासन अपनी महिला कर्मचारियों की सुरक्षा में नाकाम क्यों है?
न्याय की आस में पीड़िता
वर्तमान में, डीआईजी के आदेश पर डॉक्टर सौरभ गौतम, शिवकुमार और स्नेहा सिंह के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग तेज हो गई है। पुलिस अब इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है कि क्या यह वास्तव में एक डॉक्टर की दरिंदगी थी या फिर पुराने मुकदमे के बदले की आग में लिखी गई कोई कहानी।
प्रशासनिक लाचारी या मिलीभगत?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य और उपप्रधानाचार्य की कार्यप्रणाली पर उठता है। अगर कैंपस के भीतर महिला कर्मचारी ही सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं, तो यह संस्थान की लचर व्यवस्था का जीता-जागता सबूत है। स्थानीय सांसद जगदंबिका पाल ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए इसमें हस्तक्षेप किया है।
“डॉक्टरी एक ऐसा पेशा है जहां महिलाएं खुद को सबसे सुरक्षित महसूस करनी चाहिए। अगर अस्पताल के भीतर ही उन पर बुरी नजर रखी जाएगी और हत्या का प्रयास होगा, तो बेटियां कहां सुरक्षित रहेंगी?”
सफेद कोट पर लगा यह दाग तब तक नहीं धुलेगा, जब तक दूध का दूध और पानी का पानी नहीं हो जाता। बस्ती मंडल की जनता की नजरें अब पुलिसिया जांच और मिलने वाले न्याय पर टिकी हैं।
बड़ा सवाल: क्या यह आपसी रंजिश का नतीजा है या फिर रसूखदार डॉक्टर अपनी सत्ता का दुरुपयोग कर एक स्टाफ नर्स की आवाज दबाना चाह रहे हैं? डीआईजी को दी गई लिखित शिकायत और दर्ज मुकदमे के बाद अब पुलिस की सुई जांच की ओर है।
बस्ती मंडल की जनता अब न्याय का इंतजार कर रही है। क्या खाकी इन सफेदपोशों के चेहरों से नकाब हटा पाएगी?







