कप्तानगंज CHC बना ‘कमीशनखोरी’ का केंद्र: अधीक्षक डॉ. अनूप कुमार पर बाहर की दवा लिखने का आरोप, मरीजों की जेब पर डकैती!
साहब! ये अस्पताल है या दलालों की मंडी? अधीक्षक की कलम उगल रही बाहर की पर्चियाँ, सरकारी दवाएं हुईं डंप!
अजीत मिश्रा (खोजी)
अस्पताल बना ‘कमीशनखोरी’ का अड्डा, अधीक्षक ही लूट रहे मरीजों की जेब!
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- कप्तानगंज सीएचसी में ‘कुर्सी का रेट’ फिक्स! सरकारी सिस्टम फेल, डॉक्टर कमीशन के खेल में मस्त, जनता पस्त।
- सफेद कोट में ‘काली कमाई’ का खेल: कप्तानगंज अस्पताल के अधीक्षक के कारनामों से स्वास्थ्य विभाग शर्मसार!
- बस्ती: तड़पते मरीज और चमकती अधीक्षक की जेब; कप्तानगंज अस्पताल में बाहर की दवाओं का ‘काला साम्राज्य’।
बस्ती। सूबे की सरकार भले ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और मुफ्त दवाओं के बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन बस्ती जिले का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) कप्तानगंज इन दावों की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। यहाँ मरीजों का इलाज दवाओं से कम और दलाली से ज्यादा हो रहा है। सनसनीखेज मामला यह है कि खुद अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अनूप कुमार पर बाहर की महंगी दवाएं और जांच लिखने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

कमीशन का ‘खेल’, मरीज बेहाल
सूत्रों के मुताबिक, सीएचसी कप्तानगंज में कमीशनखोरी का ऐसा जाल बिछा है कि डॉक्टर साहब की कलम अस्पताल की सरकारी दवाओं के बजाय बाहर के मेडिकल स्टोरों की महंगी पर्चियों पर ज्यादा चलती है। यहाँ आने वाले गरीब मरीज, जो इस उम्मीद में आते हैं कि उन्हें मुफ्त इलाज मिलेगा, उन्हें बाहर की महंगी दवाएं खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है। सवाल यह है कि जब अस्पताल में दवाइयों की सप्लाई मौजूद है, तो फिर डॉ. अनूप कुमार को बाहर की दवाओं से इतना प्रेम क्यों है?
अस्पताल परिसर या दलालों की ‘मंडी’?
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो पूरा अस्पताल परिसर अब दलालों का सुरक्षित ठिकाना बन चुका है। जांच से लेकर दवाओं तक, हर कदम पर ‘मोटा कमीशन’ डॉक्टर की जेब गरम कर रहा है। अस्पताल के ही एक जिम्मेदार स्टाफ ने नाम न छापने की शर्त पर जो खुलासा किया, वह और भी चौंकाने वाला है। उन्होंने बताया कि यहाँ “कुर्सी का रेट और समय” फिक्स है; जब तक ऊपरी संरक्षण प्राप्त है, तब तक अधीक्षक साहब का बाल बांका भी नहीं हो सकता।
सरकार के आदेश कागजों तक सीमित
मुख्यमंत्री का सख्त आदेश है कि डॉक्टर केवल जेनेरिक और सरकारी दवाएं ही लिखेंगे, लेकिन कप्तानगंज सीएचसी के अधीक्षक को शायद सरकार के इन नियमों से कोई सरोकार नहीं है। जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी भी इस भ्रष्टाचार को खाद-पानी दे रही है।
तीखे सवाल: जवाब कौन देगा?
- क्या जिले के आला अधिकारी इस खुली लूट से अनजान हैं या उनकी मौन स्वीकृति है?
- सरकारी बजट की दवाएं आखिर जा कहाँ रही हैं? क्या उन्हें डंप किया जा रहा है ताकि बाहर की दवाओं का रास्ता साफ रहे?
- क्या कप्तानगंज के मरीजों को इस आर्थिक शोषण से मुक्ति मिलेगी या ‘कमीशन का खेल’ ऐसे ही जारी रहेगा?
जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और अस्पताल का मुखिया ही मरीजों की जेब पर डकैती डालने लगे, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे? अब देखना यह है कि इस रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार जागते हैं या भ्रष्टाचार की यह गंगा ऐसे ही बहती रहेगी।








