कप्तानगंज में विकास के नाम पर बिछाया ‘मौत का जाल’, नाली निर्माण अधूरा छोड़ ठेकेदार फरार!
साहब! गड्ढे में गिरेगी जान तब जागेगा प्रशासन? कप्तानगंज में महीने भर से ठप्प पड़ा नाली निर्माण।
अजीत मिश्रा (खोजी)
नगर पंचायत कप्तानगंज में विकास के नाम पर ‘विनाश’ का गड्ढा, ठेकेदार लापता और जिम्मेदार मौन!
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
- बस्ती: वायरलेस चौराहे पर ‘भ्रष्टाचार’ का गड्ढा! अधूरा निर्माण और गायब ठेकेदार ने उड़ाई जनता की नींद।
- मौत को दावत देता कप्तानगंज का अधूरा नाली निर्माण: धूल और गड्ढों के बीच सिसक रही जनता।
- कप्तानगंज नगर पंचायत: कागजों पर विकास, जमीन पर सिर्फ गहरे गड्ढे और उड़ती धूल!
बस्ती (ब्यूरो रिपोर्ट): उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार और विकास कार्यों में लापरवाही के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रही है, लेकिन बस्ती जिले के नगर पंचायत कप्तानगंज में स्थिति इसके ठीक उलट नजर आ रही है। यहाँ वायरलेस चौराहे से लेकर महराजगंज जाने वाली मुख्य सड़क पर निर्माणाधीन नाली आम जनता के लिए ‘विकास’ नहीं, बल्कि ‘काल’ का ग्रास साबित हो रही है।

महीनों से खुला गड्ढा, बड़ी दुर्घटना को खुली दावत
विभागीय सूत्रों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, करीब एक महीने पहले नाली निर्माण के लिए बड़े-बड़े गड्ढे खोदे गए थे। लेकिन अफसोस! खुदाई के बाद ठेकेदार ने काम को ऐसे ही लावारिस छोड़ दिया। आज यह खुले गड्ढे राहगीरों और आसपास के निवासियों के लिए मौत का कुआं बने हुए हैं। क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या किसी मासूम की जान जाने का इंतजार कर रहा है?
लापता ठेकेदार और धूल फांकती जनता
सवाल यह उठता है कि आखिर नाली निर्माण कार्य बीच में ही क्यों रोक दिया गया? अधूरा काम छोड़कर गायब हुआ ठेकेदार आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है? नगर पंचायत निवासी न केवल इन जानलेवा गड्ढों से परेशान हैं, बल्कि उड़ती धूल ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। लोग जान जोखिम में डालकर आने-जाने को मजबूर हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है।
जांच का विषय: आखिर क्यों थमा काम?
नगर पंचायत वासियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उनकी मांग है कि इस अधूरे और खतरनाक निर्माण कार्य को तत्काल पूरा कराया जाए। यह गंभीर जांच का विषय है कि सरकारी धन की बंदरबांट के चक्कर में क्या जनता की सुरक्षा को ताक पर रख दिया गया है?
बड़ा सवाल: क्या उच्चाधिकारी इस मामले का संज्ञान लेंगे या फिर कप्तानगंज की जनता इसी तरह धूल और गड्ढों के बीच सिसकने को मजबूर रहेगी? अब देखना यह होगा कि इस लापरवाही पर कब और क्या कार्रवाई होती है।








