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गोंडा-बस्ती से लेकर संतकबीरनगर तक फैला था नेटवर्क, मुठभेड़ में घायल सद्दाम समेत 8 शातिर चढ़े पुलिस के हत्थे

पछौरी बाग कांड का मुख्य आरोपी सद्दाम पुलिस मुठभेड़ में ढेर (घायल), भारी मात्रा में असलहा बरामद

अजीत मिश्रा (खोजी)

 एनकाउंटर में घायल हुआ फरार पशु तस्कर सद्दाम, गैंग के 8 शातिर धरे गए। पचौरी बाग से फरार चल रहे तस्कर को नक्टवा पुल के पास पुलिस ने घेरा; आत्मरक्षा में चलाई गोली, पैर में लगी बुलेट

ब्यूरो रिपोर्ट (बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश)

बिना बुलेटप्रूफ जैकेट ‘सिंघम’ लुक में दिखे थानाध्यक्ष; न हड्डी टूटी न फ्रैक्चर, पैर में ही सटीक गोली लगने से ‘फर्जी एनकाउंटर’ की बू।

बस्ती। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत अपराधियों और गो-तस्करों के खिलाफ बस्ती पुलिस ने एक बार फिर कड़ा प्रहार किया है। परसरामपुर थाना पुलिस और स्वाट टीम की संयुक्त कार्रवाई में एक शातिर पशु तस्कर पुलिस मुठभेड़ में घायल हो गया, जबकि उसके पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने कुल 8 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।

​पचौरी बाग से शुरू हुआ था ‘शिकार’

​मामला बीती 16 मई का है, जब परसरामपुर के थानाध्यक्ष (SO) विश्व मोहन राय की टीम ने पचौरी बाग इलाके में छापेमारी कर 4 गोवंशों के साथ सात पशु तस्करों को रंगे हाथों दबोचा था। इस बड़ी कार्रवाई के दौरान मुख्य सरगना सद्दाम पुलिस को चकमा देकर अंधेरे का फायदा उठाते हुए मौके से फरार हो गया था। तभी से पुलिस उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही थी।

​नक्टवा पुल पर चलीं ताबड़तोड़ गोलियां

​आज मुखबिर की सटीक सूचना पर परसरामपुर पुलिस ने नक्टवा पुल के पास सघन चेकिंग अभियान चलाया। इसी दौरान पुलिस को एक संदिग्ध मोटरसाइकिल आती दिखाई दी। पुलिस टीम ने जब उसे रुकने का इशारा किया, तो खुद को घिरा देख बदमाश सद्दाम ने आपा खो दिया और पुलिस टीम पर सीधे असलहे से फायरिंग झोंक दी।

​”बदमाश की तरफ से हुई अचानक फायरिंग के बाद पुलिस टीम ने अदम्य साहस का परिचय दिया। आत्मरक्षा में की गई जवाबी फायरिंग में एक गोली बदमाश सद्दाम के पैर में लगी, जिससे वह वहीं ढेर हो गया।”

स्वर्णिमा सिंह, क्षेत्राधिकारी (CO)

 

​संत कबीर नगर का है घायल सद्दाम, गैंग में गोंडा-बस्ती के शातिर शामिल

​पुलिस की गिरफ्त में आए इन तस्करों का नेटवर्क अंतरजनपदीय है। मुठभेड़ में घायल सद्दाम मूल रूप से जनपद संतकबीरनगर के मोहम्मदपुर का निवासी है। इसके अलावा पुलिस ने जिन 7 अन्य आरोपियों को दबोचा है, उनके नाम इस प्रकार हैं:

  1. राकेश यादव (निवासी: गढ़ी, थाना नवाबगंज, जनपद गोण्डा)
  2. रामअवतार यादव (निवासी: गढ़ी, थाना नवाबगंज, जनपद गोण्डा)
  3. सहबान उर्फ छोटू (निवासी: मंझारी, थाना हरैया, जिला बस्ती)
  4. आयुष प्रताप सिंह (निवासी: डिगरापुर, थाना कलवारी, बस्ती)
  5. सहजाद हुसैन (निवासी: केवड़ी मुस्तहकम, थाना दुबौलिया, बस्ती)
  6. मुरली सोनकर (निवासी: चौबेपुर सेमरिया, थाना परसरामपुर, बस्ती)
  7. असलम (निवासी: खमहरिया सुजात डुहरिया, थाना हरैया, बस्ती)

​असलहा, कारतूस और गोवंश बरामद

​पुलिस ने मुठभेड़ स्थल और आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में अवैध तमंचा, जिंदा व खोखा कारतूस, तस्करी में इस्तेमाल होने वाली मोटरसाइकिल और कई गोवंश बरामद किए हैं। घायल तस्कर सद्दाम को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ वह पुलिस अभिरक्षा में है।

​जनपद के परसरामपुर थाना क्षेत्र में हुई ताजा पुलिस मुठभेड़ की कहानी ने एक बार फिर यूपी पुलिस की ‘क्राइम थ्रिलर’ स्क्रिप्ट पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस द्वारा जारी एक्शन कैमरा फुटेज, फोटो, वीडियो और तैयार प्रेस नोट को देखकर तो यही लगता है कि पत्रकार सिर्फ खाकी का गुणगान करने के लिए बैठे हैं। लेकिन इस बार पुलिस की यह कथित मुठभेड़ इतनी फिल्मी थी कि ग्राउंड जीरो पर मौजूद पत्रकारों के गले भी यह कहानी नहीं उतर रही है।

सिंघम फिल्म से प्रेरित ‘बिना जैकेट’ का एनकाउंटर!

पूरी मुठभेड़ का अंदाज किसी बॉलीवुड ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘सिंघम’ से कम नहीं था। कमाल की बात यह है कि मुठभेड़ के दौरान मौके पर मौजूद जितने भी पुलिसकर्मी थे, उनमें से किसी के भी जिस्म पर बुलेटप्रूफ जैकेट तक नजर नहीं आ रही थी। थानाध्यक्ष महोदय के हाथ में चमचमाती पिस्टल और टिप-टॉप वर्दी यह बताने के लिए काफी थी कि वह किसी रील लाइफ के सिंघम से कम नहीं दिखना चाहते थे। सवाल यह उठता है कि अगर बदमाश की तरफ से सचमुच फायरिंग हो रही थी, तो जांबाज पुलिसकर्मी बिना सुरक्षा जैकेट के जान जोखिम में डालकर ‘पोज’ क्यों दे रहे थे?

अद्भुत ‘तीरंदाजी’: न हड्डी टूटी, न फ्रैक्चर… बस लगी गोली!

इस कथित एनकाउंटर का सबसे हास्यास्पद और संदेहास्पद पहलू घायल गो-तस्कर सद्दाम (निवासी: संत कबीर नगर) के पैर में लगी गोली है। पुलिस की ‘तीरंदाजी’ और सटीक निशानेबाजी की दाद देनी पड़ेगी कि आरोपी के पैर में ठीक उसी जगह गोली मारी गई, जिससे न तो उसकी कोई हड्डी टूटी और न ही कोई फ्रैक्चर हुआ। केवल ‘टारगेट’ पूरा करने के लिए पैर में मारी गई यह जादुई गोली साफ दर्शाती है कि यह मुठभेड़ पूरी तरह से प्रायोजित या फर्जी हो सकती है।

बरामदगी के नाम पर वही घिसा-पिटा सामान

पुलिस ने इस हाई-वोल्टेज एनकाउंटर के बाद घायल सद्दाम के पास से वही पुरानी रटी-रटाई बरामदगी दिखाई है—एक अवैध तमंचा, एक जिंदा कारतूस, एक खोखा और एक मोटरसाइकिल।

‘मैडम’ का फरमान: जो कह दिया, वही लिखना और दिखाना पड़ेगा

दिलचस्प बात यह है कि पुलिस ने इस मामले में कुछ आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन ‘सिंघम’ स्टाइल एनकाउंटर का तड़का सिर्फ सद्दाम के साथ लगाया गया। मुठभेड़ के बाद सीओ (CO) हरैया मैडम ने जो बयान कैमरे के सामने पढ़ दिया, मानो वही अंतिम सत्य हो। पुलिस का साफ इशारा है कि जो प्रेस नोट में लिखा है और जो मैडम ने कह दिया, सारे पत्रकारों को अखबारों में वही छापना है और टीवी चैनलों पर वही दिखाना है।

लेकिन वर्दी की धौंस और इस फिल्मी स्क्रिप्ट के पीछे छिपे सच को समझने वाले जानते हैं कि इस मुठभेड़ की हकीकत क्या है। पुलिस भले ही अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन बिना बुलेटप्रूफ जैकेट के लड़ी गई यह ‘फिल्मी जंग’ बस्ती पुलिस की साख पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर गई है।

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