सरकारी खजाना लूटने वालों की अब खैर नहीं! बस्ती में 21 लाख के गबन पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, पूर्व प्रधान और सचिव से होगी वसूली।
बस्ती में 'विकास' की लूट का हिसाब: केशवारा ग्राम पंचायत में 21.37 लाख के घोटाले में पूर्व प्रधान और सचिव पर गिरी गाज। DM कृतिका ज्योत्स्ना का कड़ा रुख: सरकारी धन के बंदरबांट पर मचा हड़कंप, 21 लाख की रिकवरी के आदेश जारी। जनता का पैसा डकारने वालों पर कार्रवाई: साऊंघाट गबन मामले में पूर्व प्रधान व सचिव को नोटिस, अब होगी वसूली।
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती में भ्रष्टाचार पर ‘डिजिटल’ प्रहार: सरकारी धन की बंदरबांट करने वाले अब नपेंगे, पूर्व प्रधान और सचिव पर 21 लाख से अधिक की वसूली का आदेश
- जनता का पैसा डकारने वालों पर कार्रवाई: साऊंघाट गबन मामले में पूर्व प्रधान व सचिव को नोटिस, अब होगी वसूली।
- केशवारा गबन मामला: पूर्व प्रधान और सचिव पर 21.37 लाख रुपये वसूली के आदेश, प्रशासन सख्त।
- बस्ती में वित्तीय अनियमितता पर बड़ी कार्रवाई: 21.37 लाख के गबन के दोषी नपे, डीएम ने दिए सख्त निर्देश।
- विकास कार्यों में धांधली: साऊंघाट में सरकारी धन के गबन के मामले में पूर्व प्रधान व तत्कालीन सचिव दोषी करार, वसूली सुनिश्चित करने के आदेश।
- क्या अब थमेगी पंचायतों में भ्रष्टाचार की बाढ़? 21 लाख के गबन पर एक्शन से मचा हड़कंप।
- साऊंघाट का ‘गबन कांड’: क्या सरकारी खजाने में वापस आएगी लूटी गई 21 लाख की रकम?
- बस्ती के ‘भ्रष्ट’ गलियारों में हड़कंप: विकास का पैसा डकारने वालों के खिलाफ डीएम ने कसा शिकंजा।
बस्ती। सरकारी खजाने को अपना निजी बैंक समझने वालों के लिए बस्ती जिला प्रशासन ने सख्त संदेश दिया है। साऊंघाट विकासखंड की केशवारा ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर हुए 21.37 लाख रुपये के गबन का मामला उजागर होने के बाद जिलाधिकारी कृतिका ज्योत्स्ना ने कड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व प्रधान और तत्कालीन सचिव से बराबर-बराबर धनराशि की वसूली के आदेश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
केशवारा ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में धांधली की शिकायत गांव के अतुल चौधरी ने की थी। प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी पाए जाने पर 11 सितंबर 2025 को ही प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए गए थे। डीआरडीए (DRDA) द्वारा की गई विस्तृत जांच के बाद 15 मई 2026 को आई अंतिम रिपोर्ट में करोड़ों के विकास का दावा करने वाले इन अधिकारियों के भ्रष्टाचार की पोल खुल गई।
प्रशासन की दो टूक: नहीं बख्शे जाएंगे भ्रष्टाचारी
जांच के दौरान प्रधान को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया, लेकिन उन्होंने न तो कोई जवाब दिया और न ही दस्तावेज पेश किए। जिलाधिकारी ने इसे गंभीर मानते हुए अब वसूली का चाबुक चलाया है:
- पूर्व प्रधान दिलीप कुमार: 10,68,809 रुपये (भू-राजस्व की भांति होगी वसूली)
- तत्कालीन सचिव पिंकी: 10,68,809 रुपये (वेतन से होगी कटौती)
जिलाधिकारी ने जिला विकास अधिकारी को निर्देशित किया है कि यह वसूली समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए।
टिप्पणी:
साऊंघाट का यह मामला महज एक बानगी है। पंचायतों में विकास के नाम पर सरकारी धन की यह लूट, भ्रष्ट तंत्र की मिलीभगत का परिणाम है। प्रशासन की यह कार्रवाई उन सभी लोगों के लिए सबक है, जो गांवों के विकास के लिए आए बजट को अपनी जेब भरने का जरिया मानते हैं। देखना यह है कि क्या यह वसूली कागजों तक सीमित रहेगी या सरकारी खजाने में पूरी धनराशि वापस आएगी?
















