संतकबीरनगर के बखिरा थाने में भाजपा पिछड़ा मोर्चा के नेता व पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य गोरख साहनी को पुलिसकर्मियों द्वारा बेरहमी से पीटने का मामला सामने आया है।
घटना के बाद डरे-सहमे पीड़ित को पुलिसकर्मी खुद मेंहदावल सीएचसी ले गए, जहां कागजी खानापूर्ति और डॉक्टर से लिखा-पढ़ी करवाकर जबरन अंगूठा लगवा लिया गया और चुपचाप घर जाने की हिदायत दी गई।
अजीत मिश्रा (खोजी)
खाकी दागदार: बखिरा थाने में भाजपा नेता को बेरहमी से पीटने का आरोप, सुलह के नाम पर मांग रहे थे 50 हजार
- पीड़ित नेता का आरोप है कि थाने के सिपाहियों ने किसी मामले में सुलह कराने के एवज में 50 हजार रुपये दिलाने की मांग की थी。
- भाजपा सरकार में दलाली न चलने की बात कहने पर सिपाही आगबबूला हो गए और गेट से थाने के अंदर घसीट कर लात-मुक्कों व बांस के डंडों से बुरी तरह पीटा।
- घटना 30 जुलाई 2026 की शाम करीब 06:30 से 07:30 बजे के बीच बखिरा थाना क्षेत्र की है।
- उच्चाधिकारियों से शिकायत करने पर फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
- पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक, मुख्यमंत्री और मानवाधिकार आयोग को शिकायती पत्र भेजकर पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
- घटनास्थल: थाना बखिरा, जनपद संतकबीरनगर।
- दिनांक व समय: 30 जुलाई 2026, शाम करीब 06:30 से 07:30 बजे के बीच।
- पीड़ित: गोरख साहनी (भाजपा पिछड़ा मोर्चा के नेता व पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य, निवासी- ग्राम सई लगड़ी, थाना बखिरा)।
- आरोपी पुलिसकर्मी: अंगद यादव, लौकेश यादव, संजीव यादव, अमित सिंह और एक अन्य।
संतकबीरनगर: उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में खाकी एक बार फिर दागदार होती नजर आ रही है। जिले के बखिरा थाने में तानाशाही और अभद्रता की हदें पार करते हुए पुलिसकर्मियों द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक नेता को बेरहमी से पीटने का मामला सामने आया है। आरोप है कि थाने के कुछ सिपाहियों ने सुलह कराने के एवज में 50 हजार रुपये की मांग की और विरोध करने पर भाजपा नेता को घसीटते हुए थाने के अंदर ले जाकर लात-घूंसों और बांस के डंडों से बुरी तरह पीटा।

क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी और पीड़ित भाजपा नेता व पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य गोरख साहनी द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिए गए शिकायती पत्र के अनुसार, दिनांक 30 जुलाई 2026 की शाम को वह बखिरा थाने पर अपने एक रिश्तेदार (सुभाष साहनी) के मामले में पैरवी और सुलह-समझौता कराने गए थे। वहां मौजूद पुलिसकर्मी अंगद यादव, लौकेश यादव, संजीव यादव और अमित सिंह ने गोलबंद होकर यह दबाव बनाया कि दोनों पक्षों से 50 हजार रुपये दिलवा दो, जिससे मामला रफा-दफा हो जाए।
“भाजपा सरकार में नहीं चलती दलाली” कहने पर भड़के सिपाही
जब पीड़ित भाजपा नेता ने पुलिसकर्मियों की इस मांग का विरोध करते हुए दो टूक कहा कि “हम लोग भाजपा पार्टी के कार्यकर्ता हैं और इस सरकार में पैसे का खेल नहीं चलता, हम दलाली नहीं करते”, तो यह बात पुलिसकर्मियों को नागवार गुजरी। आरोप है कि इतना सुनते ही सिपाही आगबबूला हो गए और गंदी-गंदी गालियां देते हुए भाजपा नेता को थाने के गेट से घसीटते हुए अंदर ले गए (जो कि थाने के सीसीटीवी कैमरे में भी कैद होने की बात कही जा रही है)।
कमरे में बंद कर बेरहमी से पीटा और फर्जी मुकदमे की दी धमकी
पीड़ित का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसे एक कमरे में बंद कर लात-मुक्कों और बांस के डंडे से बेदर्दी से पीटा। यही नहीं, जब उसने इस ज्यादती की सूचना उच्चाधिकारियों को देने की बात कही, तो आरोपियों ने उसे फर्जी मुकदमे में फंसाकर पूरा जीवन बर्बाद करने की धमकी दी।
मेडिकल और कार्रवाई के नाम पर लीपापोती
घटना के बाद डरे-सहमे पीड़ित को पुलिसकर्मी खुद महदावल सीएचसी ले गए, जहां कागजी खानापूर्ति और डॉक्टर से लिखा-पढ़ी करवाकर जबरन अंगूठा लगवा लिया गया और चुपचाप घर जाने की हिदायत दी गई।
इस पूरे घटनाक्रम से आहत पीड़ित भाजपा नेता ने पुलिस अधीक्षक (SP), उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय/राज्य मानवाधिकार आयोग को शिकायती पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है और संलिप्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
सत्ताधारी दल के नेता और जनप्रतिनिधि तक जब थाने के भीतर सुरक्षित नहीं हैं और पुलिस बेखौफ होकर वसूली व मारपीट पर उतारू है, तो आम जनता की सुरक्षा का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में उच्चाधिकारी खाकी के इन लापरवाह व दबंग नुमाइंदों पर क्या कार्रवाई करते हैं।


















