उत्तर प्रदेशबस्ती

बस्ती में अवैध मिट्टी खनन का आतंक: वाटरगंज क्षेत्र के हरदिया से पिपरा जप्ती तक धड़ल्ले से चल रहा अवैध खनन।

यदि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक, बस्ती ने इस गंभीर मामले पर तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया, तो पिपरा जप्ती की धरती पर होने वाली किसी भी अनहोनी की पूरी नैतिक जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। कानून का इकबाल बुलंद होना चाहिए, न कि माफियाओं का हौसला!

अजीत मिश्रा (खोजी)

अवैध खनन और बेलगाम माफिया: बस्ती प्रशासन की चुप्पी से किसी बड़े हादसे का इंतजार?

  • दिनभर दौड़ रहे बेलगाम वाहन: सुबह 10 बजे से रात 12 बजे तक 20 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही से ग्रामीण दहशत में।
  • मासूमों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा: तेज रफ्तार और नाबालिग चालकों द्वारा वाहन चलाने से अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से सहमे।
  • प्रधान की दो टूक चेतावनी: मंजू देवी बोलीं—”किसी दिन हो सकती है बड़ी दुर्घटना, जान-माल के नुकसान की आशंका।”
  • सड़कें पूरी तरह तबाह: ओवरलोड वाहनों के कारण पिपरा जप्ती की सड़कें गहरे गड्ढों में तब्दील, पैदल चलना भी हुआ मुश्किल।
  • प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग: स्थानीय लोगों ने डीएम और एसपी बस्ती से दोषियों पर FIR दर्ज करने की लगाई गुहार।

बस्ती, उत्तर प्रदेश: विकास और कानून के दावों के बीच उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक डरावनी तस्वीर सामने आई है। थाना वाटरगंज क्षेत्र के सिधौनी ग्राम सभा हरदिया से लेकर पिपरा जप्ती गांव तक फैला अवैध मिट्टी का कारोबार इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि स्थानीय प्रशासन और खनन माफियाओं के बीच किस तरह की साठगांठ चल रही है। दिन के उजाले से लेकर आधी रात तक बेखौफ दौड़ते ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां न सिर्फ नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि आम जनता के जीवन को भी दांव पर लगा रहे हैं।

​खुली छूट या प्रशासनिक लाचारी?

​सवाल यह उठता है कि आखिर कैसे सुबह 10 बजे से लेकर रात के 12 बजे तक, यानी चौदह घंटे तक, अवैध रूप से भरी लगभग 20 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का काफिला खुलेआम सड़कों पर दौड़ सकता है? क्या खाकी और खादी की नजरों से यह सब ओझल है? हरदिया से अवैध खनन कर इन वाहनों का बस्ती शहर की ओर रुख करना यह साबित करता है कि माफियाओं के सिर पर किसी का मजबूत हाथ है। सबसे खतरनाक पहलू यह है कि इनमें से कई ट्रैक्टरों की स्टीयरिंग नाबालिग बच्चों के हाथों में थमाई गई है। यह स्थिति न केवल अवैध खनन अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि बाल श्रम और किशोर न्याय कानूनों की भी खुली धज्जियां उड़ाती है।

​बच्चों की कैद और उजड़ता सुकून

​पिपरा जप्ती गांव के हालात आज किसी आपातकाल से कम नहीं हैं। जिस गांव में बच्चों की किलकारियां गूंजनी चाहिए थीं, वहां आज दहशत का पहरा है।

  • घरों में कैद मासूम: तेज रफ्तार और बेलगाम वाहनों के खौफ से अभिभावक अपने बच्चों को घरों में कैद रखने को मजबूर हैं।
  • शिक्षा पर ग्रहण: माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजने से भी डरने लगे हैं, क्योंकि सड़क पार करना अब किसी जोखिम भरे खेल से कम नहीं है।
  • अराजकता का माहौल: गांव की प्रधान मंजू देवी की चेतावनी—“किसी दिन कोई बड़ी दुर्घटना हो जाएगी और जान-माल का नुकसान होगा”—प्रशासन के मुंह पर एक करारा तमाचा है। क्या जिला प्रशासन किसी बड़े हादसे के घटने का इंतजार कर रहा है?

​तहस-नहस सड़कें और सरकारी धन की बर्बादी

​माफियाओं की इस अंधेरगर्दी ने पिपरा जप्ती की जीवनरेखा यानी वहां की सड़कों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। ओवरलोड वाहनों के निरंतर दबाव से डामर और मिट्टी की सड़कें गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। पैदल चलना या दोपहिया वाहन चलाना भी अब जोखिम भरा हो गया है। आने वाले बरसात के दिनों में यह स्थिति ग्रामीणों के लिए अभिशाप बन जाएगी। सवाल यह है कि जनता के टैक्स के पैसों से बनी इन सड़कों को चंद माफियाओं के मुनाफे के लिए यूं ही बर्बाद होने क्यों दिया जा रहा है?

​अब ठोस कार्रवाई की दरकार

​क्षेत्र की जनता और जनप्रतिनिधियों की पुकार साफ है:

  1. तत्काल रोक: हरदिया के अवैध खनन और पिपरा जप्ती से गुजरने वाले ओवरलोड परिवहन पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए।
  2. कड़ी कानूनी कार्रवाई: नाबालिगों से वाहन चलवाने वाले और अवैध खनन में लिप्त सभी माफियाओं की पहचान कर उनके खिलाफ तुरंत FIR दर्ज की जाए।
  3. जवाबदेही तय हो: स्थानीय पुलिस और खनन विभाग के उन जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो जिनकी नाक के नीचे यह अवैध खेल फल-फूल रहा है।

​यदि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक, बस्ती ने इस गंभीर मामले पर तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया, तो पिपरा जप्ती की धरती पर होने वाली किसी भी अनहोनी की पूरी नैतिक जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। कानून का इकबाल बुलंद होना चाहिए, न कि माफियाओं का हौसला!

Show More
Back to top button
error: Content is protected !!