
रिपोर्ट: समीर वानखेड़े, ब्यूरो चीफ
गढ़चिरौली जिला महिला एवं बाल अस्पताल में प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव (हैवी ब्लीडिंग) होने से एक 28 वर्षीय महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतका की पहचान नाजुका दिवाकर राउत (28, निवासी कोजबी, तहसील नागभीड़, जिला चंद्रपुर) के रूप में हुई है, जिनका शनिवार आधी रात को निधन हो गया। दुखद बात यह रही कि उनके नवजात बच्चे की भी जन्म के कुछ ही देर बाद मौत हो गई। आठ दिनों के भीतर इसी अस्पताल में यह दूसरी मातृ मृत्यु की घटना है।
क्या है पूरा मामला?
नाजुका राउत को डिलीवरी के लिए बोदली के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से 28 अगस्त की रात 1:23 बजे गढ़चिरौली के जिला महिला एवं बाल अस्पताल में रेफर कर भर्ती कराया गया था। 29 अगस्त की सुबह लगभग 6 बजे उनकी नॉर्मल डिलीवरी हुई, जिसमें उन्होंने ढाई किलो वजन वाले एक बच्चे को जन्म दिया। हालांकि, जन्म के कुछ समय बाद ही नवजात की मौत हो गई। इसके बाद, सुबह करीब 8 बजे से नाजुका को भारी रक्तस्राव होने लगा, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई।
डॉक्टरों ने किया इलाज, लेकिन आधी रात बिगड़ी तबीयत
स्थिति बिगड़ते देख वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण किलनाके और डॉ. प्रशांत आखाड़े को तुरंत बुलाया गया। डॉक्टरों ने अस्पताल पहुंचकर जांच की और रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए सर्जरी सहित अन्य आवश्यक उपचार किए। इलाज के बाद ब्लीडिंग रुक गई और नाजुका को खून भी चढ़ाया गया। दोपहर 3 बजे के आसपास उनकी स्थिति में सुधार बताया गया और शाम 7-8 बजे तक उनकी हालत स्थिर थी। लेकिन, आधी रात के बाद अचानक उन्हें दौरे (झटके) आने लगे। डॉक्टरों द्वारा तुरंत इलाज शुरू किया गया, लेकिन रात करीब 1:30 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया।
परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
महिला के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब नाजुका की हालत गंभीर थी, तब खून उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में काफी देरी की गई। परिजनों का दावा है कि इलाज में इसी देरी और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण ही मां और बच्चे दोनों की जान गई है। उन्होंने इस पूरे मामले की गहन जांच कर मौत के असल कारणों को स्पष्ट करने की मांग की है।
हफ्ते भर में दूसरी घटना, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
इसी जिला महिला एवं बाल अस्पताल में महज आठ दिन पहले चामोर्शी की रहने वाली 26 वर्षीय गर्भवती महिला जिजा सातर की भी प्रसव के दौरान मौत हो गई थी। उस घटना को लेकर चर्चा और सवाल अभी थमे भी नहीं थे कि नाजुका राउत की मौत का मामला सामने आ गया।
लगातार हो रही इन मौतों से जिले में मातृ मृत्यु दर, प्रसव पूर्व और प्रसव के बाद की देखभाल, तथा आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। इस पूरी घटना पर जिला महिला एवं बाल अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. माधुरी किलनाके का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।





