
उत्तर प्रदेश के खीरी जिले में वित्तविहीन शिक्षकों ने मानदेय को लेकर बैठक की जिसमें बताया गया कि उत्तर प्रदेश के वित्तविहीन शिक्षक वर्षों से पूर्ण निष्ठा, समर्पण एवं जिम्मेदारी के साथ शिक्षण कार्य कर रहे हैं शिक्षक शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, किंतु अत्यंत दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि वित्तविहीन शिक्षकों को आज भी सम्मानजनक मानदेय प्राप्त नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में विद्यालयों द्वारा किसी शिक्षक को मात्र ₹3000, किसी को ₹5000 तथा किसी को ₹7000 प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है, वह भी समय पर नहीं मिल पाता।
इतने अल्प मानदेय में शिक्षकों एवं उनके परिवारों का भरण-पोषण अत्यंत कठिन हो गया है। शिक्षकों को अपने परिवार की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करने में गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। जब शिक्षक स्वयं और अपने परिवार का जीवनयापन सम्मानपूर्वक नहीं कर पाएगा, तो केवल कैशलेस चिकित्सा जैसी योजनाएँ उसके जीवन की मूल समस्याओं का समाधान नहीं कर सकतीं।
समस्त वित्तविहीन शिक्षकों ने माननीय मुख्यमंत्री जी, अनुरोध किया है कि जिस तरह अन्य विभिन्न विभागों में मानदेय दे रहे हैं और मानदेय बढ़ोत्तरी का कार्य भी किया है जो सराहनीय कदम है। किंतु अत्यंत खेद का विषय है कि वित्तविहीन शिक्षक, जो वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, उन्हें आज तक सरकार द्वारा किसी प्रकार का निश्चित मानदेय प्रदान नहीं किया गया। यह स्थिति वित्तविहीन शिक्षकों के प्रति उपेक्षापूर्ण एवं अत्यंत निराशाजनक प्रतीत होती है।
एक ओर नियमित शिक्षकों की भांति वित्तविहीन शिक्षक समान शिक्षण कार्य करने के बावजूद आर्थिक असुरक्षा और असमानता का सामना कर रहे हैं। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि सामाजिक एवं शैक्षिक न्याय के सिद्धांतों के भी विपरीत है।
समस्त वित्तविहीन शिक्षकों ने माननीय मुख्यमंत्री जी से निवेदन किया है कि इस गंभीर विषय पर विचार कर मानदेय देने की की कृपा करेंगे ।
यह बैठक जिले के भारतीय इण्टर कॉलेज मैगलगंज खीरी मे सम्पन्न हुई जिसमें कई विद्यालयों के वित्तविहीन शिक्षक पदाधिकारी और शिक्षक मौजूद रहे।


















