
श्री हरि विष्णु ने गजेन्द्र का किया था उद्धार

उदवंतनगर। भगवान श्री हरि विष्णु ने गजेन्द्र की आर्तनाद सुनी व उसकी रक्षा के लिए दौड़ पड़े।जल में ग्राह (मगरमच्छ) को मार कर गजराज को मुक्त कराया। भगवान सदैव अपने भक्त की रक्षा किए तत्पर रहते हैं जरूरत है सच्चे मन से पुकारने की। उक्त बातें जिला मुख्यालय आरा के जीरो माइल एकौना समीप वास्तु विहार के नर्मदेश्वर महादेव के प्रांगण में गुरुवार को सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा व ज्ञान महायज्ञ का चौथे दिन कथावाचक श्रीमद् सनातन शक्तिपीठाध्यक्ष आचार्य (डॉ) भारत भूषण जी महाराज ने मौजूद श्रद्धालुओं को सुनाई। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत के अष्टम स्कन्द में गजेन्द्र मोक्ष का वर्णन है। ग्राह के साथ युद्ध में असहाय गजेन्द्र ने नारायण को पुकारा । भक्त वत्सल भगवान दौड़े चला आए और का गज का उद्धार किया।ग्राह को मुक्ति प्रदान किया । गजेन्द्र ने प्रभु की अस्तुती किया। शुक्रवार को राजा बली व भगवान बामन की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि कैसे श्री हरि ने बाली के घमंड को तोड़ा। उन्होंने श्रद्धालुओं को वामन व राजा बलि प्रसंग सुनाया । राजा बलि को यह अभिमान था कि उसके बराबर सामर्थ्यवान इस संसार में कोई नहीं है। भगवान ने राजा बलि का अभिमान चूर करने के लिए वामन का रूप धारण किया और भीक्षा मांगने राजा बलि के पास पहुंचे ।राजा से वर के रूप में तीन पग भूमि मांगा। मदांध बाली के वचन देने पर उन्होंने पहले पग में धरती व आकाश,दूसरे पग में पाताल नाप लिया। बाली ने तीसरे पग के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया। प्रभु ने प्रसन्न होकर बाली को इंद्रा बनने का आशीर्वाद दिए ।कथा में भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव कथावाचक सुनाई गई। कृष्ण के बाल्यकाल की कथा ने सबको भाव विभोर कर दिया।कंस वध व राजा उग्रसेन की राजगद्दी की कथा सुनाई । मौके पर आयोजन समिति के अध्यक्ष गणेश सिंह, मणि मिश्र, छोटू मिश्र, ब्रज किशोर दुबे, पप्पू पांडेय, विनोद शर्मा, राकेश सिंह, हरेंद्र सिंह पैक्स अध्यक्ष अरविन्द सिंह, महेंद्र सिंह मुखिया,सुनील मिश्र एवं समस्त वास्तु विहार परिवार के सदस्य गण उपस्थित थे।





