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बिना टेंडर ही दीक्षांत समारोह में खर्च दिए 40 लाख रुपये

सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में एक अक्टूबर को हुए दीक्षांत समारोह में टेंडर नहीं कराया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुराने टेंडर की शर्ताें के अनुसार ही दीक्षांत समारोह में 40 रुपये से अधिक खर्च किया है, जबकि राज्य सरकार की व्यय नीति के अनुसार किसी भी सरकारी कार्यक्रम में एक लाख रुपये से अधिक का भुगतान टेंडर के माध्यम से ही होना चाहिए।

सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में आठवें दीक्षांत समारोह में जर्मन हैंगिंग पांडाल एवं भोजन व्यय के लिए भी टेंडर नहीं हुआ। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पिछले दीक्षांत समारोह के टेंडर को आधार मानकर ही यह बड़ा आयोजन करा दिया, जबकि वह दीक्षांत समारोह में एक दिसंबर 2023 को हुआ था। इस बार भी उसी फर्म से कराया गया है, जिसने पिछले दीक्षांत समारोह में किया था। विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क है कि पिछले दीक्षांत समारोह का टेंडर एक दिसंबर 2023 के पहले हुआ था, जिसे हुए एक साल नहीं बीता है, जबकि वित्तीय मामलों के जानकार इस वित्तीय अनियमितता बता रहे हैं।राज्य सरकार की व्यय नीति के अनुसार 25 हजार रुपये तक के क्रय बिना किसी प्रक्रिया को अपनाए किया जा सकता है, जबकि 25 हजार रुपये से एक लाख रुपये के भुगतान में कोटेशन प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसमें तीन कोटेशन में न्यूनतम दर को स्वीकार किया जाता है। उसके बाद एक लाख रुपये से अधिक के भुगतान के लिए टेंडर प्रक्रिया ही वैध है। दीक्षांत समारोह में जर्मन हैंगिंग पांडाल एवं अतिथियों एवं छात्र-छात्राओं के भोजन पर एक लाख रुपये से अधिक का भुगतान होना तय था, लेकिन इसमें भी टेंडर जारी नहीं किया गया। इस बार दीक्षांत समारोह में पांडाल का आकार बढ़ाकर 2000 लोगों को बैठने की व्यवस्था की गई थी, जबकि मंच का आकार भी बढ़ाया गया था। पांडाल में मंच पर एसी सिस्टम था, जबकि सामने लगी कुर्सियों पर बैठे लोग गर्मी और उमस से बेहाल रहे। नेता प्रतिपक्ष विधान सभा माता प्रसाद पांडेय के बगल में बैठी सपा विधायक सैय्यदा खातून भी गर्मी से राहत पाने के लिए पुस्तक झलते हुए दिखी थीं। दीक्षांत समारोह समाप्त हुआ तो विश्वविद्यालय के अलावा महाविद्यालयों में भी अव्यवस्थाओं पर चर्चा हो रही है। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह का बजट 40 लाख रुपये था। पिछले दीक्षांत समारोह से पहले जो टेंडर हुआ था, उसी के अनुसार इस बार दीक्षांत समारोह किया गया। यह टेंडर एक साल के अंदर हुआ था इसलिए इसे स्वीकार कर लिया गया।
-अजय सोनकर, वित्त अधिकारी, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु

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