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सरकार की नजर अब लाऊड स्पीकर पर, 55 डेसिबल का उल्लंघन किया तो स्थायी रूप से रद्द होगी अनुमति, देवेंद्र फडणवीस का बड़ा ऐलान

स्थानिक पुलिस निरीक्षक करेंगे आवाज के तीव्रता की जांच

समीर वानखेडे:
सरकार अब राज्य में पूजा स्थलों पर लाऊड स्पीकर की आवाज पर कड़ी नजर रखेगी। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि जो भी 55 डेसिबल के नियम का उल्लंघन करेगा उसकी अनुमति स्थायी रूप से रद्द कर दी जाएगी। फडणवीस ने कहा कि पूजा स्थलों पर लाऊड स्पीकर की आवाज की तीव्रता की जांच करना पुलिस निरीक्षक का काम है और उसे इसकी जानकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को देनी होगी।
राज्य में पूजा स्थलों पर लाऊड स्पीकर की आवाज को लेकर कई शिकायतें मिली हैं। आज विधानसभा में इस बारे में प्रश्न पूछा गया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि कानून के मुताबिक, अगर ये लाऊड स्पीकर अधिक डेसिबल पर बजते हैं तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्रवाई करता है। किसी को भी बेतरतीब ढंग से लाऊड स्पीकर बजाने की अनुमति नहीं होगी। अनुमति एक निश्चित अवधि के लिए दी जाएगी। इसके बाद यदि किसी को दोबारा अनुमति की आवश्यकता होगी तो उसे पुलिस से नए सिरे से अनुमति लेनी होगी। 
उल्लंघन होने पर अनुमति स्थायी रूप से रद्द कर दी जाएगी।
देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “राज्य में अगर कोई 55 डेसिबल और 45 डेसिबल का उल्लंघन करता है तो उसे दोबारा कभी इजाजत नहीं दी जाएगी। हॉर्न जब्त कर लिए जाएंगे। इसका सख्ती से पालन हो रहा है या नहीं, यह देखना पुलिस इंस्पेक्टर की जिम्मेदारी होगी। पुलिस इंस्पेक्टर को हर पूजा स्थल पर जाकर उसका निरीक्षण करना चाहिए। इसके लिए हर थाने में मीटर की व्यवस्था की गई है। उसके बाद अगर कोई इसका उल्लंघन करता है तो सबसे पहले इसकी सूचना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दी जाए। दूसरे चरण में दोबारा ऐसे हॉर्न की इजाजत नहीं दी जाएगी”।
केंद्रीय कानून के अनुसार, यह कार्रवाई करने की जिम्मेदारी प्रदूषण बोर्ड की है। देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि केंद्र से इस संबंध में नियमों में कुछ बदलाव करने का भी अनुरोध किया जाएगा। 
यह देखना स्थानीय पुलिस इंस्पेक्टर की जिम्मेदारी है कि नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि वह काम नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 
मस्जिदों में हॉर्न के इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग पहले भी कई बार उठ चुकी है। मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने भी इस पर आवाज उठाई। इसके बाद भोंगा के खिलाफ कुछ कार्रवाई की गई। लेकिन बाद में ऐसा प्रतीत हुआ कि कार्रवाई एक बार फिर शांत हो गई है। 

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