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मनरेगा के पशु शेड से बदली अक्तीराम की तकदीर मनरेगा से मिला पशुओं को पक्का आवास

🙏जिला संवाददाता सुखदेव आजाद 🙏

सोनबरसा गांव के अक्तीराम का जीवन संघर्षों से भरा था। वे जांजगीर-चांपा के एक छोटे से गांव में रहते हुए अपनी आजीविका खेती और पशुपालन के माध्यम से चला रहे थे, लेकिन उनके पास इतने साधन नहीं थे कि वे अपने पशुओं के लिए एक अच्छा आश्रय बना सकें। बरसात में उनके मवेशी भीग जाते थे, गर्मी में छांव नहीं मिलती थी, और ठंड में बीमार पड़ जाते थे। इससे न सिर्फ उनके दूध उत्पादन पर असर पड़ता, बल्कि दवा और देखभाल का खर्च भी बढ़ जाता था। ऐसे में एक दिन गांव में आयोजित रोजगार दिवस के माध्यम से मनरेगा अधिकारियों से उन्हें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत मिलने वाले पशु शेड योजना के बारे में बताया। फिर क्या था यहां से उनकी जिंदगी में बदलाव आया और उनके घर पशुओं के लिए पक्का पशुशेड का निर्माण किया गया और इस बदलाव से उनका वर्तमान और भविष्य दोनों सुधर गया।
जांजगीर-चांपा जिले के जनपद पंचायत बलौदा के ग्राम पंचायत सोनबरसा के रहने वाले अक्तीराम गांव में काफी अरसे से पशुओं का पालन पोषण करते हुए अपनी आजीविका अर्जित कर रहे थे, कच्चा एवं खुले मैदान में वह अपने पशुओं को रखने की विविशता से जूझ रहे थे। उनके पास इतना पैसा भी नहीं था कि वह पशुओं के लिए अच्छा और पक्का घर तैयार करा सके। ऐसे में एक दिन उन्हें रोजगार दिवस के माध्यम से जानकारी मिली कि महात्मा गांधी नरेगा के माध्यम से पशुओं के लिए पक्का शेड का निर्माण किया जाता है, फिर बिना देर किये ही अक्तीराम ने तुरंत ग्राम पंचायत में आवेदन किया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिला पंचायत की ओर से उन्हें पशु शेड निर्माण के लिए प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। पशुशेड के लिए प्रशासकीय स्वीकृति के रूप में 77 हजार 700 रूपए मंजूर हुए। राशि स्वीकृत होने के बाद शेड तैयार करना शुरू किया और जैसे-जैसे शेड तैयार होता गया उनके पशुओं के रहने का आसरा भी उनके सपने की तरह पूरा होते नजर आने लगा। वह दिन आया जब शेड बनने के बाद अक्तीराम के पशु सुरक्षित रहने लगे। बारिश, गर्मी और ठंड का असर कम हो गया, जिससे दूध उत्पादन में बढ़ोतरी हुई। अतिरिक्त आय होने से बच्चों की पढ़ाई व खेती में भी सुधार हुआ। मनरेगा के तहत पशु शेड योजना ने अक्तीराम जैसे कई किसानों का जीवन बदला है। यह सिर्फ एक शेड नहीं था, बल्कि उनके लिए आत्मनिर्भरता और समृद्धि की नई राह थी। अक्तीराम का कहना है कि मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के तहत पशु शेड योजना ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा देने और किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए बनाई गई है। इस योजना के तहत गरीब और लघु सीमांत किसानों को पशुओं के लिए एक सुरक्षित आश्रय (शेड) बनाने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। वह कहते हैं कि पशुपालन से मिलने वाला गोबर जैविक खाद के रूप में खेतों की उर्वरता भी बढ़ा रहा है। योजना से आर्थिक सहायता मिलने के कारण व्यक्तिगत खर्च कम हुआ है।

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