नियम दर किनार, दे दिए बिजली के कनेक्शन
लंबी दूरी के कनेक्शन देकर लाखों का चूना लगाने का मामला
अंबेडकरनगर
जनपद में बिजली से जुड़ा कोई काम बिना घूसखोरी के हो जाए यह संभव नहीं है. बिजली बिल सुधारवाने से लेकर नए कनेक्शन, प्राइवेट लाइन खिंचवाने से लेकर ट्रांसफार्मर लगवाने तक और विभागीय ट्रांसफर से लेकर पोस्टिंग तक हर कदम पर पैसा ही मायने रखता है. जो पैसा खर्च करता है उसके लिए इस विभाग में कोई भी काम मुश्किल नहीं है. बिना पैसे कोई काम हो जाए तो ये सपने के साकार होने जैसा है.बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारी उपभोक्ताओं को शिकार बनाकर बड़े-बड़े घोटालों को अंजाम दे रहे हैं. यही नहीं विजली विभाग को भी जमकर चूना लगा रहें हैं. विभाग में पहले ऐसे तमाम घोटाले हो चुके हैं जो यह साबित करने के लिए काफी है कि ये विभाग घोटालों का विभाग है. जनपद मुख्यालय के आसपास की नई कॉलोनियों में बिजली विभाग के अफसरों ने नियमों को दरकिनार कर करीब 1000 नए बिजली कनेक्शन दे दिए हैं। नियम हैं कि खंभे से 40 मीटर से अधिक दूरी होने पर इस्टीमेट बनाकर ही कनेक्शन दिया जाता है, लेकिन नई कॉलोनियों में 100 से 200 मीटर तक बिना खंभा लगाए बांस-बल्लियों पर केबल खींचकर घरों को कनेक्शन दे दिया गया है। तेज हवा चलते ही बांस-बल्ली केबल समेत जमीन पर गिर जाते हैं। इससे बड़े हादसे का डर रहता है।हर माह लगभग पांच लाख से अधिक का बिजली बिल अदा करने के बाद भी नई बस्तियों और कॉलोनियों के लोग बांस और बल्लियों के सहारे लाइन खींचकर घर रोशन कर रहे हैं। इससे हादसे का अंदेशा रहता है। इनमें 1000 से अधिक मकानों में बिजली विभाग ने कनेक्शन तो दे दिया, लेकिन आज तक खंभे नहीं लगाए।अलबत्ता लोग स्वयं के खर्चे से 100 से 200 मीटर दूर से बांस बल्लियों के सहारे बिजली की लाइन खींचकर घरों को रोशन कर रहे हैं। इन कॉलोनियों में दिए गए कनेक्शन के केबल नीचे तक लटके हैं।तेज हवा चलने पर कई बार बांस-बल्ली समेत केबल टूटकर नीचे गिर जाते हैं। इससे हादसों का खतरा बना रहता है। बारिश में करंट फैलने की आशंका भी रहती है।खुलेआम हो रहे अंधेर को देखकर भीआला अधिकारी तक मौन हैं। अधिकारी विशेष के लिए मामले में विभाग में हो रही लूट न दिखना सवाल खड़े करती है।हालांकि इसकी बानगी शहर के नव विकसित इलाकों में कदम-कदम पर देखने को मिल जाएगी।40 मीटर की दूरी तक कनेक्शन देने का खर्च केस्को करता है। 40 मीटर से अधिक दूरी होने पर केबिल आदि के एस्टीमेट का खर्च उपभोक्ता को उठाना होता है। कुछ ऐसा ही मामला गौहन्ना पेट्रोल टंकी के पीछे देखने को मिला जहां बिजली के पोल से लगभग डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर बिजली का कनेक्शन बिना इस्टीमेट के ही दे दिया गया है। मिली जानकारी के अनुसार बिजली विभाग में अधिकारी हो या कर्मचारी बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता. विभाग के अधिकारी अपने कर्मचारियों को भी नहीं छोड़ते हैं. वैसे जनपद मुख्यालय पर ही अगर उच्च स्तरीय जांच करवा दी जाए तो बिजली विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों के गण नप जाएंगे।








