

सुमिता शर्मा :
पूर्व वन, सांस्कृतिक मामले और मत्स्य पालन राज्य मंत्री विधायक श्री सुधीर मुनगंटीवार ने युवाओं से पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी के जीवन कार्यों से देशभक्ति, सेवा और त्याग की शिक्षा लेकर सामाजिक परिवर्तन के लिए उनके आदर्शों को आत्मसात करने की अपील की।* वे राजमाता पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर की त्रिशताब्दी जयंती के अवसर पर चंद्रपुर के प्रियदर्शिनी इंदिरा गांधी सभागार में भारतीय जनता युवा मोर्चा ग्रामीण और महानगर तथा भाजपा युवा योद्धाओं द्वारा आयोजित युवा सम्मेलन में बोल रहे थे।
सम्मेलन का मार्गदर्शन मुख्य वक्ता के रूप में सुप्रसिद्ध वक्ता डॉ. सच्चिदानंद शेवड़े ने किया। इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष हरीश शर्मा, महानगर अध्यक्ष राहुल पावड़े, भाजयुमो जिला अध्यक्ष महेश देवकते, महानगर अध्यक्ष विशाल निंबालकर, डॉ. मंगेश गुलवाड़े, सविता कांबले, संध्या गुरनुले, राखी कंचरलावर, आशीष देवताले, अलका अतराम, रामपाल सिंह, सूरज पेडुलवार, किरण बुटले, अनिल डोंगरे, अमित गुंडावर, तनय देशकर, यश बांगड़े, प्रवीण तायड़े, गणेश रामगुंडावर, ओम पवार आदि उपस्थित थे ।
आगे बोलते हुए विधायक श्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी का जन्म 31 मई 1725 को हुआ था। अहिल्यादेवी होलकर के न्यायपूर्ण प्रशासन, धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और जनकल्याण के कार्यों के कारण लोगों ने उन्हें ‘पुण्यश्लोक’ की उपाधि दी थी। अहिल्यादेवी ने राज्य जीतने के लिए नहीं बल्कि लोगों के दिलों को जीतने के लिए काम किया। अन्य शासकों ने भौगोलिक क्षेत्रों को जीतने के लिए शासन किया, लेकिन अहिल्यादेवी ने लोगों के दिलों को जीतकर शासन किया। पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर ने 300 साल पहले समाज के मन में जो स्थापित करने का प्रयास किया, सभी को उनके उज्ज्वल व्यक्तित्व से अपने विचारों की चमक प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।
युवाओं का मार्गदर्शन करते हुए विधायक श्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा, “चंद्रपुर को पिछड़ा जिला न समझें। चंद्रपुर वह जिला है जिसने भारत-चीन युद्ध के दौरान सबसे अधिक सोना दान किया था। यह वह जिला है जो बाबा आमटे की समाज सेवा का संदेश देता है। सहिष्णुता के साथ सद्गुण और कर्म को भी जोड़ें। सद्गुणी बनने का संकल्प लें,” उन्होंने अपील भी की। विधायक श्री सुधीर मुनगंटीवार ने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि युवाओं के सद्गुणों के कारण हमारा देश निश्चित रूप से 2047 में दुनिया के शक्तिशाली देशों से भी आगे निकल जाएगा।
सुप्रसिद्ध वक्ता डॉ. सच्चिदानंद शेवड़े ने अपने अनूठे अंदाज में पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर के जीवन, उनके शासन और धर्म कार्यों पर प्रकाश डाला। पति की मृत्यु के बाद अहिल्याबाई होल्कर ने न केवल अपनी क्षमताओं को पहचान कर शासन चलाया बल्कि लोगों के कल्याण के लिए भी काम किया। इन घटनाओं का उदाहरण देते हुए डॉ. शेवड़े ने युवाओं को अपनी क्षमताओं को पहचान कर आगे बढ़ने की सलाह दी। थोड़ी सी असफलता और तुच्छ कारणों से आत्महत्या की घटनाएं व्यथित करने वाली हैं। अहिल्यादेवी ने एक ओर राजनीति की तो दूसरी ओर धर्म कार्य भी किया। अपनी ताकत को पहचानो। अपने जुनून को पहचानो और उसके अनुसार करियर चुनो। किसी चीज से कमतर मत समझो। उन्होंने हर चीज के बारे में सकारात्मक सोचने और आगे बढ़ने का मंत्र भी दिया। भले ही उनके पति और ससुराल वालों की उनकी आंखों के सामने मौत हो गई और उनकी खुद की बेटी सती हो गई, लेकिन अहिल्यादेवी ने कभी हार नहीं मानी। डॉ. सच्चिदानंद शेवड़े ने उनके चरित्र से प्रेरणा लेने और असफलता से निराश न होने की अपील भी की।







