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बबलिया में दिखा दुर्लभ गिद्ध, ग्रामीणों और वन विभाग ने मिलकर बचाई जान

मंडला जिले के सहायक वन परिक्षेत्र बबलिया के अंतर्गत ग्राम बबलिया माल में एक दुर्लभ और विलुप्तप्राय पक्षी **गिद्ध** बीमार अवस्था में ग्रामीण क्षेत्र के रास्ते पर दिखाई दिया। गिद्ध उड़ने और चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ था, जिससे वह वहीं एक जगह बैठा रहा।

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मंडला MP हेमंत नायक महाराजपुर

बबलिया में मिला बीमार गिद्ध, ग्रामीणों की सतर्कता और वन विभाग की तत्परता से बची विलुप्त प्रजाति की जान*

मंडला (बबलिया)

मंडला जिले के सहायक वन परिक्षेत्र बबलिया के अंतर्गत ग्राम बबलिया माल में एक दुर्लभ और विलुप्तप्राय पक्षी गिद्ध बीमार अवस्था में ग्रामीण क्षेत्र के रास्ते पर दिखाई दिया। गिद्ध उड़ने और चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ था, जिससे वह वहीं एक जगह बैठा रहा। जब ग्रामीणों ने गिद्ध को देखा, तो उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा होने लगी। इस दुर्लभ दृश्य की सूचना तत्काल वन विभाग को दी गई।

स्थानीय ग्रामीणों की सजगता और वन विभाग की त्वरित प्रतिक्रिया से गिद्ध को सुरक्षित बचा लिया गया। उसे तुरंत बेहतर इलाज के लिए जबलपुर पशु चिकित्सालय भेजा गया, जहां वह अब डॉक्टरों की निगरानी में उपचाराधीन है।

पूर्व वन सुरक्षा समिति के अध्यक्ष संगतलाल और ग्रामीण बाबूलाल यादव ने सबसे पहले इस गिद्ध को गांव में अस्वस्थ अवस्था में देखा। उन्होंने इसकी सूचना तुरंत वनरक्षक दंडोतिया को दी। वनरक्षक ने मौके पर पहुँचकर गिद्ध की स्थिति का जायजा लिया और उच्च अधिकारियों को सूचित किया। निर्देश मिलने के बाद बिना किसी देरी के गिद्ध को वाहन द्वारा जबलपुर भेजा गया।

वन विभाग की इस त्वरित कार्रवाई से एक विलुप्तप्राय प्रजाति के पक्षी की जान बचाई जा सकी, जो कि जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

बाबूलाल यादव ने कहा कि इस प्रकार के विलुप्त हो रहे पक्षियों के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका अत्यंत अहम है। यह घटना न केवल जागरूकता और जिम्मेदारी का उदाहरण है, बल्कि यह बताती है कि जब जन सहयोग और सरकारी तत्परता एकजुट होते हैं, तब दुर्लभ प्रजातियों की रक्षा संभव हो पाती है।

यह प्रयास प्राकृतिक संतुलन और वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम है, जिससे भविष्य में ऐसी प्रजातियों को बचाने के लिए प्रेरणा मिलती है।

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