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सहारनपुर: सरसावा में यमुना पुल के नीचे जान जोखिम में डालकर लोग निकाल रहे बड़े-बड़े पेड़, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर ले जाने का वीडियो वायरल 

जनपद सहारनपुर के सरसावा क्षेत्र में यमुना नदी के किनारे आज फिर एक बार वही दृश्य देखने को मिला जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सहारनपुर: सरसावा में यमुना पुल के नीचे जान जोखिम में डालकर लोग निकाल रहे बड़े-बड़े पेड़, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर ले जाने का वीडियो वायरल

📍 सहारनपुर/सरसावा

जनपद सहारनपुर के सरसावा क्षेत्र में यमुना नदी के किनारे आज फिर एक बार वही दृश्य देखने को मिला जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शाहजहांपुर पुलिस चौकी के पास स्थित यमुना पुल के नीचे लोग खुलेआम जान जोखिम में डालकर नदी से बड़े-बड़े पेड़ निकालते नजर आए। ये लोग बिना किसी सुरक्षा इंतज़ाम के नदी की तेज धारा में उतरकर बहकर आए पेड़ों को खींचकर किनारे ला रहे थे और फिर उन्हें ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर ले जाते दिखाई दिए। इस खतरनाक गतिविधि का वीडियो कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिससे यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

इस तरह के दृश्य कोई पहली बार सामने नहीं आए हैं। बीते कई हफ्तों से लगातार ऐसी खबरें मिल रही हैं कि सरसावा और आसपास के इलाकों में लोग बाढ़ में बहकर आए विशालकाय पेड़ों को अपने कब्ज़े में ले रहे हैं। हालांकि यह गतिविधि न केवल खतरनाक है बल्कि कई दृष्टिकोण से अवैध भी हो सकती है। नदी के बीचों-बीच जाकर लकड़ी निकालना किसी भी पल दुर्घटना को न्योता दे सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले दिनों ही कुछ युवक पानी में फिसलते-फिसलते बच गए थे, वरना बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि नदी के बीच लोग पानी में उतरकर पेड़ खींच रहे हैं और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां किनारे खड़ी हैं जिनमें लकड़ी भर-भरकर डाली जा रही है। हैरानी की बात यह है कि यह सब दिनदहाड़े और पुलिस चौकी के पास हो रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब पुलिस-प्रशासन को घटनास्थल की जानकारी है, तो फिर इस अवैध कार्यवाही पर रोक क्यों नहीं लगाई जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि यमुना के तेज बहाव के बीच बिना सुरक्षा के उतरना आत्महत्या करने जैसा है। इसके बावजूद लोग पैसों के लालच और लकड़ी के अवैध कारोबार की वजह से इस खतरनाक खेल में शामिल हो रहे हैं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि इस पूरे खेल में लकड़ी माफियाओं की भूमिका है, जो स्थानीय स्तर पर बेरोजगार और गरीब लोगों को लालच देकर नदी में उतारते हैं और खुद मोटे मुनाफे में रहते हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर यह लकड़ी आसपास के बाजारों में बेची जा रही है और इसकी कोई रोकथाम नहीं है।

कानूनन देखा जाए तो बिना अनुमति नदी या वन क्षेत्र से लकड़ी निकालना पूर्णतः अवैध है। ऐसे मामलों में भारतीय वन अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण कानूनों के तहत कठोर कार्रवाई का प्रावधान है। लेकिन सरसावा में हालात यह हैं कि इन कानूनों की धज्जियां खुलेआम उड़ाई जा रही हैं। सवाल यह है कि जब वीडियो वायरल होकर हर किसी की नज़रों तक पहुंच रहा है तो क्या प्रशासन इन वीडियो को नहीं देख पा रहा, या जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?

स्थानीय समाजसेवियों का कहना है कि प्रशासन की चुप्पी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है। उनका कहना है कि अगर समय रहते रोकथाम नहीं हुई तो कभी भी दर्जनों लोगों की जान यमुना के तेज बहाव में जा सकती है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही इस गतिविधि पर अंकुश नहीं लगा तो वह सामूहिक रूप से आंदोलन करेंगे और मामले को हाईकोर्ट तक ले जाएंगे।

इस मामले में पर्यावरणविदों ने भी गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि नदी से बहकर आए पेड़ों को इस तरह हटाना पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी नुकसानदायक है। नदी का प्रवाह, किनारे की मिट्टी और प्राकृतिक संतुलन इन पेड़ों की मौजूदगी से प्रभावित नहीं होता, लेकिन जब इन्हें बलपूर्वक हटाया जाता है तो भूमि कटाव और नदी के बहाव में भी बदलाव आ सकता है।

सवाल प्रशासन से यह भी है कि ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए जब इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी बाहर जा रही है, तो आखिर उसकी जांच और कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। क्या यह सब कुछ स्थानीय स्तर पर मिलीभगत का हिस्सा है? लोग पूछ रहे हैं कि क्या राजस्व और पुलिस विभाग आंख मूंदकर भू-माफियाओं और लकड़ी तस्करों को संरक्षण दे रहे हैं।

गौरतलब है कि सहारनपुर जनपद पहले भी अवैध खनन, अवैध लकड़ी कटान और पर्यावरण से छेड़छाड़ के मामलों को लेकर सुर्खियों में रहा है। अब यमुना पुल के नीचे वायरल हो रहे यह वीडियो न केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है, बल्कि यह भी साबित कर रहा है कि अवैध कारोबारियों के हौसले किस हद तक बुलंद हैं।

स्थिति यह है कि आम लोग इस पूरे मामले से डरे और चिंतित हैं। वे चाहते हैं कि पुलिस और जिला प्रशासन तुरंत कठोर कार्रवाई कर इस गतिविधि पर रोक लगाए। लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

अब देखना यह होगा कि वायरल वीडियो के बाद क्या प्रशासन नींद से जागता है या फिर यह सिलसिला इसी तरह जारी रहेगा। अगर जल्द ही कोई कदम नहीं उठाया गया, तो यह केवल अवैध कारोबार का ही नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण का भी गंभीर मुद्दा बन सकता है।


🖊️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक — समृद्ध भारत समाचार पत्र एवं वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़

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