
जिले की सोनहत ग्राम पंचायत इन दिनों भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। पंचायत पर गंभीर आरोप लगे हैं कि यहां छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियमों 2002(Store Purchase Rules) की खुलेआम अनदेखी की जा रही है और मनमाने तरीके से वेंडरों के बिल लगाकर सरकारी राशि का आहरण किया जा रहा है।
मुख्य आरोप और अनियमितताएं*
* छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम 2002 का उल्लंघन: जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत द्वारा सामग्री खरीदी में निर्धारित शासकीय भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। नियमानुसार, एक निश्चित राशि से ऊपर की खरीदी के लिए कोटेशन या टेंडर प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, लेकिन कथित तौर पर इस नियम को ताक पर रखा जा रहा है।
मनमाने वेंडरों के बिल
आरोप है कि पंचायत द्वारा अपनी पसंद के वेंडरों (Vendors) से मनमाने तरीके से ऊंचे दामों पर सामग्री खरीदी जा रही है और उनके फर्जी/मनगढ़ंत बिल लगाकर राशि का भुगतान किया जा रहा है।
15वें वित्त की राशि का अवैध आहरण
यह पूरी प्रक्रिया सरकारी खजाने से राशि के अवैध आहरण का जरिया बन गई है। ग्रामीणों एवं अन्य दुकानदारों का कहना है कि वास्तविक रूप से खरीदी गई सामग्री की कीमत काफी कम है, लेकिन बिलों में बढ़ा-चढ़ाकर राशि दिखाई जा रही है।
अधिकारियों की मिलीभगत:
पंचों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह अनियमितता पंचायती राज अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है हम 15पंचों ने कई जगह शिकायत की इसके बावजूद आजतक कोई कार्यवाही नहीं की गई
🔎 *जांच की मांग*
इस गंभीर मामले पर, क्षेत्र के गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के ब्लॉक सचिव जनार्दन गुप्ता ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनकी मांग है कि:
* ग्राम पंचायत द्वारा विगत वर्षों में की गई समस्त क्रय सामग्री की भौतिक सत्यापन (ऑडिट) करवाई जाए।
*वेंडरों को किए गए भुगतान के बिलों की वास्तविकता की जांच हो।*
* दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और वेंडरों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
*पंच एवं ग्रामीणों की राय है कि अगर इस तरह नियमों की अनदेखी जारी रही, तो सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचने के बजाय चंद लोगों की जेबें भरता रहेगा।















