

जिला अस्पताल बना निजी अस्पतालों का रेफर सेंटर? — मरीज को निजी हॉस्पिटल भेजने के मामले में तीन डॉक्टरों की जांच समिति गठित
प्रेस क्लब की लिखित शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग हरकत में — जिला अस्पताल के डॉक्टरों पर निजी लाभ के लिए मरीजों को रेफर करने के आरोप, सीएमएचओ ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर सौंपी जिम्मेदारी
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बलौदाबाजार।
जिले के शासकीय अस्पतालों के मरीजों को कुछ निजी अस्पतालों का “रेफर स्टेशन” बनाए जाने के आरोप पर मामला अब गंभीर जांच के घेरे में पहुंच गया है। हाल ही में बलौदाबाजार प्रेस क्लब द्वारा उठाए गए इस मुद्दे ने न केवल जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोली है, बल्कि सरकारी सेवा की पारदर्शिता और नैतिकता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
मामला 26 सितंबर 2025 का
जानकारी के अनुसार, 26 सितंबर 2025 को परमानंद राणा नामक व्यक्ति सड़क दुर्घटना में घायल होकर जिला अस्पताल बलौदाबाजार में भर्ती कराया गया था। उस समय ड्यूटी पर तैनात डॉ. वसीम रज़ा ने मरीज की स्थिति को “गंभीर” बताते हुए उसे अपने ही निजी अस्पताल ओंकार हॉस्पिटल में रेफर कर दिया।
शिकायतकर्ता मोहनलाल अग्रवाल (मरीज के परिचित) ने प्रेस क्लब को भेजे पत्र में बताया कि ओंकार हॉस्पिटल में न केवल मरीज के परिजनों से इलाज और जांच के नाम पर मनमाने ढंग से भारी राशि वसूली गई, बल्कि मरीज को किसी अन्य अस्पताल ले जाने की अनुमति भी नहीं दी गई।
प्रेस क्लब ने उठाई आवाज, पारित किया प्रस्ताव
लगातार मिल रही ऐसी शिकायतों को देखते हुए बलौदाबाजार प्रेस क्लब ने 15 अक्टूबर 2025 को आपात बैठक आहूत की। बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि जनहित एवं स्वास्थ्य सेवा की पारदर्शिता के मद्देनज़र इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है।
सदस्यों ने कहा कि शासकीय अस्पतालों को निजी क्लीनिकों का रेफर सेंटर बनाना गरीब और जरूरतमंद मरीजों के साथ आर्थिक एवं मानसिक शोषण है।
प्रेस क्लब द्वारा पारित प्रस्ताव के अनुसार, 16 अक्टूबर 2025 को जिला कलेक्टर, स्वास्थ्य मंत्री, जिला प्रभारी मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल एवं मुख्य जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को लिखित शिकायत सौंपी गई।
सीएमएचओ ने बनाई तीन सदस्यीय जांच समिति
प्रेस क्लब की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए सीएमएचओ डॉ. राजेश अवस्थी ने एक तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है।
इसमें शामिल हैं —
•डॉ. अशोक वर्मा
•डॉ. कल्याण कुर्वंशी
•डॉ. टेंभूरकर
समिति को सभी दस्तावेज, बयान और साक्ष्य एकत्र कर विस्तृत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. अवस्थी ने प्रेस क्लब को जानकारी दी कि –
“मामला गंभीर है। समिति को निर्धारित समय सीमा में जांच पूरी करने को कहा गया है। जांच रिपोर्ट अनुसार विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
लगातार मिल रही हैं शिकायतें — डॉक्टरों पर निजी लाभ के आरोप
प्रेस क्लब के सूत्रों के अनुसार, जिला अस्पताल के कुछ चिकित्सक एवं कर्मचारी अपने या परिचितों के निजी अस्पतालों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। इसी संबंध का लाभ उठाकर मरीजों को सरकारी अस्पताल में इलाज असंभव बताकर निजी क्लीनिकों में भेजा जाता है, जिससे वहां इलाज के नाम पर अत्यधिक धनवसूली की जा सके।
यह प्रवृत्ति अब आम हो चुकी है, और कई बार मरीजों के परिजन यह समझ ही नहीं पाते कि उनके साथ किस स्तर का आर्थिक दोहन हो रहा है।







