
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। जौनपुर में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र रैकेट का भंडाफोड़।।
⭐ पांच सौ से ज्यादा प्रमाण पत्र बरामद, 5 सदस्य गिरफ्तार की।
05 दिसंबर 25, उत्तर प्रदेश।
जौनपुर पुलिस ने एक बड़े साइबर रैकेट का पर्दाफाश किया है, जो ग्राम पंचायत अधिकारियों की लॉगिन आईडी का दुरुपयोग कर हजारों फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कर रहा था। पुलिस टीम ने दबिश देकर 9 एंड्रॉइड मोबाइल और 4 लैपटॉप बरामद किए, जिनका इस्तेमाल ऑनलाइन फ्रॉड में किया जाता था।
👉 पहली कार्रवाई: दो सदस्यों की गिरफ्तारी—
नहोरा सई नदी के किनारे शाम 7:10 बजे पुलिस ने पहली कार्रवाई की।
⭐ गिरफ्तार आरोपी—
🥷 अंकित यादव उर्फ शुभम यादव (23), मऊ
🥷 राजकुमार उर्फ विक्की (22), गौतमबुद्ध नगर
दोनों से 3 मोबाइल फोन और 3 लैपटॉप बरामद हुए। पुलिस के अनुसार, यही लोग फर्जी डेटा एंट्री और बनावट प्रमाण पत्र तैयार करने में सक्रिय थे।
👉 दूसरी कार्रवाई: तीन और आरोपी दबोचे गए—
उपनिरीक्षक अनिल कुमार तिवारी और विजय कुमार सिंह की टीम ने बाकराबाद हाईवे तिराहा पर सुबह 5 बजे दबिश देकर तीन और आरोपियों को पकड़ा—
🥷 राशिद (26), बिहार
🥷 राजीव कुमार (24), अमरोहा
🥷 अभिषेक गुप्ता (31), लखनऊ
इनसे 6 मोबाइल फोन और 1 लैपटॉप जब्त हुआ। टीम का कहना है कि ये आरोपी राज्यों के बाहर तक ग्राहक जोड़कर फर्जी प्रमाण पत्र की सप्लाई करते थे।
⭐ ग्राम पंचायत अधिकारियों की आईडी का दुरुपयोग—
एसपी सिटी आयुष श्रीवास्तव ने बताया कि गिरोह उत्तराखंड, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के ग्राम पंचायत अधिकारियों की जीमेल आईडी और लॉगिन क्रेडेंशियल हैक कर सरकारी वेबसाइट पर लॉगिन कर लेता था। नाम, माता-पिता का नाम, पता और जन्मतिथि जैसी बुनियादी जानकारी हासिल कर ये लोग असली जैसा प्रतीत होने वाला जन्म प्रमाण पत्र तैयार कर देते थे।
⭐ मोटी कमाई: 20,000 में लॉगिन, 600–700 में प्रमाण पत्र—
जांच में सामने आया कि गिरोह व्हाट्सऐप व फेसबुक ग्रुपों में ग्राहक तलाशता था। एक दिन की लॉगिन ID-पासवर्ड 20,000 रुपये में बेची जाती थी। तैयार प्रमाण पत्र 600–700 रुपये में मुहैया कराया जाता था।
पुलिस के मुताबिक, पिछले डेढ़ साल में गिरोह ने हजारों प्रमाण पत्र जारी किए। कार्रवाई के दौरान 500 से अधिक दस्तावेज बरामद हुए हैं। एक मामले में व्यक्ति का पता पश्चिम बंगाल का पाया गया, जबकि प्रमाण पत्र महाराष्ट्र के पोर्टल से जारी हुआ था।
⭐ फर्जी प्रमाण पत्र से बड़े दस्तावेज बन रहे थे—
एसपी सिटी के अनुसार, इन नकली जन्म प्रमाण पत्रों के आधार पर कई लोगों ने आधार कार्ड, पासपोर्ट, और अन्य सरकारी दस्तावेज आसानी से बनवा लिए थे। यह सुरक्षा प्रणाली के लिए एक गंभीर खतरा बन चुका था।
⭐ ऐसे फूटा पूरा मामला–
जौनपुर निवासी रतन कुमार ने अपनी बेटी का जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए विजय यादव को आवेदन दिया था।सीएमओ कार्यालय में सत्यापन के दौरान प्रमाण पत्र फर्जी निकला। यहीं से पुलिस जांच आगे बढ़ी और इसमें रामभरत मौर्या (चंदौली) समेत कई नाम सामने आए।
⭐ AnyDesk के जरिए पासवर्ड रीसेट—
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे पंचायत की ID से मिलते-जुलते पासवर्ड बनाते, AnyDesk पर स्क्रीन शेयरिंग लेकर पासवर्ड रीसेट करते थे।
अब पुलिस पूरे नेटवर्क की परत दर परत जांच कर रही है और जल्द बड़ी गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।जौनपुर पुलिस ने आरोपियों पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। जिन अधिकारियों की आईडी से फर्जी दस्तावेज जारी हुए, उन्हें प्रमाण पत्र निरस्त करने के लिए नोटिस भेजा जाएगा।















