“अजीब कारनामा: पुरानी नींव पर भ्रष्टाचार की नई इमारत, धर्मसिंहवा में सरकारी धन की सरेआम लूट।”
"धर्मसिंहवा नगर पंचायत का 'शौचालय घोटाला': 5 साल पुराने निर्माण पर फिर से फूंके जा रहे 8 लाख रुपए!"
अजीत मिश्रा (खोजी)
💫 नगर पंचायत धर्मसिंहवा में ‘विकास’ के नाम पर सरकारी धन की लूट?
💫 अजीब कारनामा: 5 साल पुराने शौचालय को ढहाकर फिर से बन रहा 8 लाख का ‘नया’ ढांचा।
💫 “अध्यक्ष, ईओ और जेई की तिकड़ी का ‘ऑफलाइन’ खेल; छिबरा वार्ड में सामुदायिक शौचालय बना कमाई का जरिया।”
धर्मसिंहवा, संतकबीरनगर।। उत्तर प्रदेश के नवसृजित नगर पंचायतों में विकास की बयार बहनी चाहिए थी, लेकिन संतकबीरनगर की नगर पंचायत धर्मसिंहवा से एक ऐसा ‘अजीबोगरीब’ कारनामा सामने आया है, जो सरकारी धन के बंदरबांट की तरफ सीधा इशारा कर रहा है। यहाँ छिबरा वार्ड में एक सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य चर्चा का विषय बना हुआ है, जहाँ “पुरानी शराब को नई बोतल” में परोसने का खेल खेला जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
मामला छिबरा वार्ड का है, जहाँ अभी पाँच वर्ष पूर्व ही ग्राम पंचायत कार्यकाल के दौरान 5.71 लाख रुपए की लागत से एक सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया था। नियमानुसार, किसी भी सरकारी निर्माण के नवीनीकरण या पुनर्निर्माण के लिए एक निश्चित समय सीमा (अक्सर 10-15 वर्ष) और ढांचे की जर्जर स्थिति का होना अनिवार्य है। लेकिन यहाँ नियमों को ताक पर रखकर, उसी पुराने शौचालय की जगह अब नगर पंचायत 8 लाख रुपए से अधिक का नया टेंडर जारी कर निर्माण करा रही है।
भ्रष्टाचार का ‘त्रिभुज’: अध्यक्ष, ईओ और जेई पर सवाल
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इस कार्य के पीछे नगर पंचायत अध्यक्ष, अधिशासी अधिकारी (EO) और अवर अभियंता (JE) की एक सोची-समझी ‘जुगलबंदी’ है। सूत्रों के अनुसार:
ऑफलाइन निविदा का खेल: पारदर्शिता को दरकिनार करते हुए इस कार्य की निविदा (टेंडर) ‘ऑफलाइन’ तरीके से डाली गई, ताकि चहेतों को काम दिया जा सके।
धन की बर्बादी: जब 5.71 लाख वाला ढांचा पहले से मौजूद था, तो जनता की गाढ़ी कमाई के 8 लाख रुपए फिर से उसी जगह क्यों फूंके जा रहे हैं?
तकनीकी जांच का अभाव: क्या जेई ने इस स्थल का भौतिक सत्यापन किया था? यदि हाँ, तो उन्होंने 5 साल पुराने भवन को अनुपयोगी कैसे घोषित कर दिया?
“यह सीधे तौर पर सरकारी बजट को ठिकाने लगाने की साजिश है। पुराने शौचालय में मामूली मरम्मत कराकर उसे नया दिखाया जा रहा है या फिर अनावश्यक निर्माण कर कमीशन का खेल खेला जा रहा है।” — स्थानीय निवासी
प्रशासनिक चुप्पी और जनता के सवाल
नगर पंचायत धर्मसिंहवा के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले पर स्पष्ट जवाब देने से बच रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या जिलाधिकारी और शासन के उच्च अधिकारी इस ‘पैसे की बर्बादी’ का संज्ञान लेंगे? क्या इस निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच होगी या भ्रष्टाचार की यह नींव ऐसे ही मजबूत होती रहेगी?
– अजीत मिश्रा (खोजी)








