
कोरिया – सोनहत । आस्था, परंपरा और जन-सरोकार के संगम में आज उस समय एक आत्मीय दृश्य देखने को मिला, जब छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और कोरबा सांसद श्रीमती ज्योत्स्ना महंत वनांचल क्षेत्र सोनहत के ग्राम मेण्ड्रा पहुंचे। अवसर था हसदो नदी के उद्गम स्थल पर स्थित शिव मंदिर में दर्शन पूजन और क्षेत्र की जनता से मुलाकात की।
शिव भक्ति से हुई मंगल शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ हसदो नदी के पवित्र उद्गम स्थल पर निर्मित प्राचीन शिव मंदिर में जलाभिषेक के साथ हुआ। डॉ. महंत और सांसद ज्योत्स्ना महंत ने पुर्व विधायक गुलाब कमरो के साथ पूरी श्रद्धा के साथ भगवान भोलेनाथ का पूजन-अर्चन कर प्रदेश की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। हसदो के तट पर गूंजते मंत्रोच्चार ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
*जनता के बीच ‘महंत दंपत्ति की मुलाकात*
पूजा के पश्चात महंत दंपत्ति ने स्थानीय ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की इस दौरान ग्रामीणों का उत्साह देखने लायक था।
*समस्याओं पर मंथन:* ग्रामीणों ने पेयजल, सड़क, शिक्षा और वनाधिकार पट्टों से जुड़ी अपनी विभिन्न समस्याओं को प्रमुखता से रखा।
*संवेदनशीलता के साथ निराकरण* : डॉ. चरणदास महंत ने एक अभिभावक की भांति लोगों की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और अधिकारियों से चर्चा कर तत्काल निराकरण का भरोसा दिया।
*हसदो का संरक्षण:* सांसद ज्योत्स्ना महंत ने हसदो नदी के संरक्षण और स्थानीय पर्यावरण को बचाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई सांसद ज्योत्स्ना महंत ने इस दौरान कहा कि मेण्ड्रा और सोनहत का यह क्षेत्र उनके परिवार की तरह है।
*अन्नपूर्णा सेवा: कथा के पश्चात आयोजित भंडारे में डॉ. महंत ने बांटा भंडारा*
पूजा अर्चना पश्चात डा महंत ने बुजुर्गों, महिलाओं और नन्हे बच्चों के बीच बैठकर न केवल उनकी कुशलक्षेम पूछी, बल्कि अपने हाथों से उन्हें भंडारे का प्रसाद वितरित किया। उनके इस अपनत्व को देखकर ग्रामीण भावुक हो उठे। यह दृश्य दर्शाता है कि उनके लिए ‘जनता ही जनार्दन’ है।
जन-सेवा की मिसाल: डॉ. महंत ने अपने हाथों से परोसा ‘प्रसाद’*
इस प्रवास का सबसे भावुक और प्रेरणादायक दृश्य तब देखने को मिला जब नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने प्रोटोकॉल और पद की गरिमा को किनारे रखकर एक सच्चे जनसेवक की भूमिका निभाई।
आहुति से महका वातावरण: लोक-कल्याण के लिए किया हवन
जलाभिषेक के पश्चात डॉ. महंत और सांसद ज्योत्स्ना महंत ने यज्ञशाला में बैठकर विधि-विधान से हवन-पूजन किया। ‘स्वाहा’ के उद्घोष के साथ अग्नि कुंड में आहुतियां अर्पित करते हुए उन्होंने चराचर जगत के कल्याण और क्षेत्र की खुशहाली की प्रार्थना की। हवन की पवित्र सुगंध और वैदिक मंत्रों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति के चरम पर पहुंचा दिया














