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“तमाचा मारेंगे… किस थाने से हो? प्रभारी का नाम बताइए…” कानपुर में कवरेज से लौट रहे पत्रकार से सिपाही की कथित अभद्रता,

थप्पड़ की धमकी का वीडियो वायरल—पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

🚨📹 “तमाचा मारेंगे… किस थाने से हो? प्रभारी का नाम बताइए…” कानपुर में कवरेज से लौट रहे पत्रकार से सिपाही की कथित अभद्रता, थप्पड़ की धमकी का वीडियो वायरल—पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल 🚨📹

कानपुर। जनपद Kanpur में एक पत्रकार के साथ कथित दुर्व्यवहार और धमकी का मामला सामने आने के बाद प्रदेश की पुलिस कार्यप्रणाली पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। घटना उस समय की बताई जा रही है जब एक पत्रकार कवरेज कर वापस लौट रहे थे और अपनी स्कूटी निकालने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान वहां मौजूद एक वर्दीधारी सिपाही ने कथित रूप से उन्हें रोका और अभद्र भाषा का प्रयोग किया।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में सिपाही को कथित तौर पर यह कहते सुना जा सकता है—“तमाचा मारेंगे… किस थाने से हो? प्रभारी का नाम बताइए…”। वीडियो में यह भी दिखाई देता है कि पत्रकार शांतिपूर्वक अपनी पहचान बता रहे हैं और स्थिति को सामान्य रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सिपाही का लहजा आक्रामक प्रतीत होता है।

पत्रकार का आरोप है कि उन्होंने केवल अपनी स्कूटी निकालने की बात कही थी, लेकिन सिपाही ने बिना किसी ठोस कारण के उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। यहां तक कि कथित तौर पर थप्पड़ मारने की धमकी भी दी गई। पूरे घटनाक्रम को पत्रकार ने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया, जिसके बाद यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया।

घटना सामने आने के बाद पत्रकार संगठनों और स्थानीय मीडिया कर्मियों में रोष देखा जा रहा है। उनका कहना है कि यदि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी ही पत्रकारों के साथ इस प्रकार का व्यवहार करेंगे तो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता और सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है।

यह भी उल्लेखनीय है कि पत्रकार अक्सर जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में कवरेज करते हैं। ऐसे में उनसे सहयोगात्मक व्यवहार अपेक्षित होता है, न कि धमकी या अभद्रता। मीडिया प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि कोई कानूनी या सुरक्षा कारण होता, तो उसे शालीनता से समझाया जा सकता था।

फिलहाल पुलिस विभाग की ओर से इस प्रकरण पर कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार वीडियो की सत्यता और परिस्थितियों की जांच की जा सकती है। यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित सिपाही के खिलाफ विभागीय कार्रवाई संभव है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के लिए आचरण नियमावली स्पष्ट है। सार्वजनिक स्थान पर अभद्र भाषा, धमकी या अनुचित व्यवहार सेवा नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है। ऐसे मामलों में विभागीय जांच, निलंबन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना रहती है।

सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है और आमजन भी अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है, वहीं कुछ ने पुलिस और मीडिया के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया है।

यह घटना केवल एक व्यक्ति विशेष का मामला नहीं, बल्कि व्यापक रूप से पुलिस-मीडिया संबंधों और सार्वजनिक आचरण से जुड़ा प्रश्न है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या निष्पक्ष जांच के बाद उचित कार्रवाई होती है।


संपादक – एलिक सिंह
वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
ब्यूरो प्रमुख – हलचल इंडिया न्यूज़, सहारनपुर

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