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सिद्धार्थनगर स्वास्थ्य विभाग की ‘चुप्पी’: फर्जी अस्पतालों को मिल रही है खुली छूट, मरीजों की जान खतरे में!

नोटिस का नाटक और माफिया का राज: सिद्धार्थनगर में बिना लाइसेंस चल रही हैं जानलेवा मशीनें।

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। स्वास्थ्य विभाग की ढिलाई, मरीजों की जान से हो रहा खिलवाड़: सिद्धार्थनगर में ‘फर्जीवाड़े’ को खुली छूट।।

सिद्धार्थनगर। क्या सिद्धार्थनगर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी किसी बड़ी अनहोनी का इंतज़ार कर रहे हैं? मोहाना चौराहे पर चल रहे अस्पतालों और जांच केंद्रों के ‘फर्जीवाड़े’ का सच सामने आए 15 दिन से अधिक बीत चुके हैं, विभाग की पुष्टि भी हो चुकी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल कागजी नोटिस का ‘नाटक’ चल रहा है। इस खामोशी के पीछे की वजह क्या है? क्या ये अस्पताल संचालक इतने रसूखदार हैं कि कानून इनके सामने बौना साबित हो रहा है?f92fa1b4 df0c 4448 b7f5 f646221568f0 1773375769021

⭐कागजों में 10, जमीन पर अवैध साम्राज्य

मोहाना स्थित ‘मोगिस हॉस्पिटल एंड पॉलीक्लिनिक’ का सच किसी से छिपा नहीं है। पंजीकरण मात्र 10 बेड का, लेकिन संचालन दो अलग-अलग इमारतों में। नियम-कानूनों को ताक पर रखकर अस्पताल ने अपना साम्राज्य फैला रखा है। जांच में खुद स्वास्थ्य विभाग ने माना कि अस्पताल में बिना किसी वैध लाइसेंस के एक्स-रे और सीआर (CR) मशीनें धड़ल्ले से चल रही हैं। क्या इन मशीनों से निकलने वाला रेडिएशन मरीजों की सेहत के लिए खतरा नहीं है? या फिर विभाग के लिए मरीजों की सुरक्षा केवल एक खानापूर्ति है?e7c1b7b4 286c 4bb8 a9c6 59cfbd22ede8 1773375769019

⭐फर्जी पैथोलॉजी का खुला खेल

सिर्फ अस्पताल ही नहीं, बल्कि इसी चौराहे पर ‘आदर्श पैथोलॉजी’ और ‘आर्यन अल्ट्रासाउंड सेंटर’ का बिना पंजीकरण के चलना यह साबित करता है कि जिले में ‘स्वास्थ्य माफिया’ पूरी तरह से बेलगाम हैं। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने जब वहां का निरीक्षण किया, तो अनियमितताओं की परतें खुल गईं। नोटिस थमाया गया, जवाब मांगा गया—लेकिन उसके बाद? सब कुछ ‘ठंडे बस्ते’ में डाल दिया गया।932cbd0e bd38 4e16 977f fae7f0d2f0b0 1773375769020

⭐कार्रवाई के नाम पर केवल ‘मौन’ क्यों?

सवाल यह है कि जब अनियमितताओं की पुष्टि हो गई, तो मशीनों को सील क्यों नहीं किया गया? अवैध रूप से चल रहे केंद्रों पर ताले क्यों नहीं लगे? 15 दिन बीतने के बाद भी अस्पताल और जांच केंद्र का बदस्तूर जारी रहना, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह सब कुछ मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। यदि समय रहते इन पर लगाम नहीं कसी गई, तो किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिसका जिम्मेदार सीधे तौर पर स्वास्थ्य विभाग होगा।

⭐जवाबदेही तय हो

स्वास्थ्य विभाग को यह समझना होगा कि उनका काम केवल नोटिस जारी करना नहीं है, बल्कि अवैध गतिविधियों को बंद करना भी है। यदि अधिकारी सख्त कार्रवाई नहीं कर सकते, तो उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे किन मजबूरियों में इन फर्जी अस्पतालों को संरक्षण दे रहे हैं? जनता अब कागजी जवाब नहीं, ठोस कार्रवाई चाहती है।

क्या विभाग किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही नींद से जागेगा?IMG 20260314 113824

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