बस्ती नगर पालिका में ‘कर’ का काला खेल: 4 दिन में 10 गुना बढ़ा टैक्स, अधिकारी बेलगाम!
डिजिटल इंडिया या 'वसूली' का नया हथकंडा? पोर्टल पर कुछ और, दफ्तर में कुछ और!
अजीत मिश्रा (खोजी)
📢बस्ती नगर पालिका में ‘कर’ का खेल: जनता पर 10 गुना बोझ, अधिकारी बेलगाम!📢
⭐EO की टीम का ‘अद्भुत’ कारनामा: बिना परिक्षण ₹3,712 का बिल रातों-रात हुआ ₹39,784!
⭐पर्दाफाश: क्या बीजेपी के कोर वोटर को प्रताड़ित कर रही है नगर पालिका की टीम?
🚨धोखाधड़ी: पद और प्रतिष्ठा देखकर लगाया जा रहा है हाउस टैक्स, सरकारी विभागों पर मेहरबानी क्यों?
🔥सवाल: 31 मार्च की डेडलाइन के नाम पर डिमांड बिलों में मनमाना संशोधन, क्या यह नियम विरुद्ध नहीं?
उत्तर प्रदेश।
बस्ती। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाती है, लेकिन बस्ती नगर पालिका परिषद के कारिंदे इस नीति को ठेंगा दिखा रहे हैं। यहाँ नियम-कायदे दफ्तर की फाइलों में नहीं, बल्कि अधिकारियों की मनमर्जी से तय हो रहे हैं। मामला सीधे तौर पर जनता के आर्थिक उत्पीड़न और दोहरी नीति का है, जहाँ महज चार दिनों के भीतर एक गृहस्वामी का टैक्स बिल 3,712 रुपये से बढ़ाकर सीधे 39,784 रुपये कर दिया गया।
💫क्या है पूरा मामला?
भवन संख्या 1068 (वार्ड संख्या 5) के मामले ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
👉19 मार्च 2026: अधिशाषी अधिकारी (EO) श्री अंगद गुप्ता, KNA श्री उदय भान, टैक्स इंस्पेक्टर श्री ललित मिश्रा और टीसी श्री जितेन्द्र सोनकर की टीम द्वारा एक बिल (संख्या B 5172526016410) जारी किया गया। इसमें वर्ष 2014 से 2026 तक का कुल बकाया ब्याज सहित 3,712 रुपये दर्शाया गया।
👉20 मार्च 2026: जब बिल जमा करने हेतु टैक्स कलेक्टर से संपर्क किया गया, तो विभाग ने नया राग अलापा। राजस्व निरीक्षक ललित मिश्रा ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि इस भवन का ‘कर निर्धारण’ (Assessment) ही नहीं हुआ है।
👉22 मार्च 2026: अचानक उसी पुराने बिल नंबर और उसी तिथि पर एक नया संशोधित बिल थमा दिया गया, जिसमें राशि को 10 गुना बढ़ाकर 39,784 रुपये कर दिया गया।
💫हैरतअंगेज सवाल: दफ्तर में बैठकर किसका ‘खेल’?
बिना किसी स्थलीय निरीक्षण या ठोस आधार के, महज तीन दिन में टैक्स की राशि में दस गुना की बढ़ोतरी होना ‘अद्भुत’ है। सवाल यह है कि क्या बस्ती नगर पालिका में कर का निर्धारण भवन की स्थिति देखकर होता है या भवन स्वामी की पद, प्रतिष्ठा और राजनीतिक विचारधारा देखकर?
एक तरफ नगर पालिका माइक से घोषणा कर रही है कि e-nagarsewaup पोर्टल पर उपलब्ध बिल के अनुसार भुगतान करें, वहीं दूसरी तरफ 31 मार्च की डेडलाइन के नाम पर डिमांड बिलों में रातों-रात मनमाना संशोधन किया जा रहा है। क्या यह नियम विरुद्ध नहीं है?
💫बीजेपी के ‘कोर वोटर’ पर प्रहार या कोई बड़ी साजिश?
शहरी क्षेत्र का मतदाता पारंपरिक रूप से भारतीय जनता पार्टी का आधार रहा है। ऐसे में अधिशाषी अधिकारी अंगद गुप्ता और उनकी टीम द्वारा आम जनता की कमर तोड़ना कई संदेह पैदा करता है।
“क्या अधिकारी जानबूझकर सरकार की छवि धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं? या फिर यह जनता को प्रताड़ित कर अपनी जेबें गरम करने का कोई नया हथकंडा है?”
एक तरफ आम जनता को छोटे-छोटे बकाये के लिए नोटिस थमाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी विभागों पर करोड़ों का जलकर और गृहकर बकाया है, जिसकी वसूली के नाम पर अधिकारी मौन साधे हुए हैं।
📢चेतावनी: आगामी चुनाव में भुगतना पड़ेगा खामियाजा!
नगर पालिका परिषद बस्ती के अध्यक्ष, उनके प्रतिनिधि अंकुर श्रीवास्तव और सम्मानित सभासदों को अब एकजुट होने की जरूरत है। यदि अधिकारियों की इस ‘अवैध वसूली’ और ‘मानसिक उत्पीड़न’ पर लगाम नहीं लगाई गई, तो इसका खामियाजा आगामी चुनावों में सत्ता पक्ष को भुगतना पड़ सकता है।
माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा जी और भाजपा प्रदेश नेतृत्व को बस्ती के इस ‘टैक्स सिंडिकेट’ पर संज्ञान लेना चाहिए। जनता अब छली नहीं जाएगी; उसे न्याय चाहिए, उत्पीड़न नहीं!
मण्डल ब्यूरो चीफ, बस्ती मण्डल








