


🚨⚡ सहारनपुर विकास प्राधिकरण में भ्रष्टाचार का ‘खुला खेल’: लोकायुक्त को गुमराह करने से लेकर सील तोड़ने तक—अवैध निर्माणकर्ताओं के आगे बेबस सिस्टम? उपाध्यक्ष सूरज पटेल की साख पर बड़ा सवाल!
सहारनपुर। सहारनपुर विकास प्राधिकरण (SDA) एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है, जहां भ्रष्टाचार, सांठगांठ और प्रशासनिक लापरवाही का ऐसा संगीन मामला सामने आया है जिसने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन बल्कि संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता एलिक जॉन सिंह द्वारा लोकायुक्त उत्तर प्रदेश में दर्ज कराई गई शिकायत के बाद शुरू हुई जांच अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां प्राधिकरण की भूमिका खुद कटघरे में नजर आ रही है। आरोप है कि लोकायुक्त की सख्ती के बावजूद SDA के अधिकारियों ने अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करने के बजाय ‘कागजी खानापूर्ति’ का खेल खेलते हुए असली दोषियों को संरक्षण देने का काम किया।
सूत्रों के अनुसार, लोकायुक्त की रडार पर आए अंबाला रोड स्थित चर्चित प्रांकुर अस्पताल के अवैध निर्माण को सील करने के बजाय अधिकारियों ने पास की एक छोटी दुकान पर कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह महज लापरवाही है या फिर सुनियोजित भ्रष्टाचार, जिसमें मोटी रकम के बदले बड़े अवैध निर्माणों को खुला संरक्षण दिया जा रहा है। यह घटना सीधे तौर पर प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर भी सवालिया निशान खड़े करती है।
इसी बीच एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। अंबाला रोड स्थित ‘रुतबा बैंक्वेट हॉल’ को SDA द्वारा सील किए जाने के कुछ ही समय बाद अवैध निर्माणकर्ता ने खुलेआम सील तोड़ दी और संचालन फिर शुरू कर दिया। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर उल्लंघन के बावजूद अब तक न तो कोई FIR दर्ज की गई है और न ही किसी प्रकार की सख्त कार्रवाई की गई है। यह घटना न केवल प्रशासनिक कमजोरी को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अवैध निर्माणकर्ताओं के हौसले किस कदर बुलंद हैं कि वे कानून और लोकायुक्त जैसी संस्थाओं को भी चुनौती देने से नहीं डर रहे।
इससे पहले भी ‘रुतबा बैंक्वेट हॉल’ को सील करने के बाद महज 24 घंटे के भीतर खोल दिए जाने का मामला सामने आया था, जिसने पूरे शहर में चर्चा का विषय बना दिया था। अब एक बार फिर सील तोड़ने की घटना ने यह साबित कर दिया है कि प्राधिकरण के भीतर एक ऐसा गठजोड़ सक्रिय है, जो नियम-कानून को ताक पर रखकर रसूखदारों को फायदा पहुंचा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने SDA के उपाध्यक्ष सूरज पटेल की कार्यशैली और साख को भी सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या उन्हें इन अनियमितताओं की जानकारी नहीं दी जा रही, या फिर सब कुछ उनकी जानकारी में हो रहा है? विभागीय गलियारों में चर्चा है कि कुछ अधिकारी फाइलों में गलत रिपोर्ट प्रस्तुत कर उच्च अधिकारियों को गुमराह कर रहे हैं, जिससे वास्तविक कार्रवाई प्रभावित हो रही है।
अब पूरे मामले में जनता की नजरें उपाध्यक्ष सूरज पटेल पर टिक गई हैं। क्या वे इन भ्रष्ट और बेलगाम अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए निलंबन और FIR जैसी कठोर कार्रवाई करेंगे, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
शिकायतकर्ता की ओर से संकेत मिले हैं कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे एंटी करप्शन कोर्ट का रुख करेंगे, जिससे यह मामला और भी गंभीर रूप ले सकता है।
👉 कुल मिलाकर, सहारनपुर विकास प्राधिकरण में चल रहा यह ‘सीलिंग का खेल’ अब प्रशासनिक ईमानदारी की सबसे बड़ी परीक्षा बन चुका है। अब देखना यह होगा कि क्या शासन इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई करता है, या फिर भ्रष्टाचार का यह किला यूं ही मजबूत होता रहेगा।
✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
ब्यूरो चीफ – दैनिक आशंका बुलेटिन, सहारनपुर
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