अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: खाकी और प्रशासन की नाक के नीचे ‘पीला पंजा’ मचा रहा तांडव, अवैध खनन से उखड़ रही सड़कें और सांसें
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- सफेदपोशों के संरक्षण में ‘पीला पंजा’ बेकाबू: नियमों को ठेंगा दिखा उखाड़ी जा रही सड़कें।
- यमराज बनकर दौड़ रहे मिट्टी लदे डंपर, धूल और दहशत के साये में राहगीर!
- नर्सरी के पास अवैध खनन की खुली लूट, क्या कुंभकर्णी नींद सो रहा है वाल्टरगंज थाना?
- साहब! सड़क पर चलना हुआ मुहाल: तेज रफ्तार डंपरों ने भगौड़ी गांव में मचाया कोहराम।
- वाह रे व्यवस्था! भगौड़ी गांव में दिन-दहाड़े खनन, पर जिम्मेदारों की आँखों पर बंधी पट्टी।
- जीरो टॉलरेंस का निकला दम: वाल्टरगंज में खनन माफिया की ‘सरकार’!
बस्ती। जनपद में मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों और जीरो टॉलरेंस की नीति को ठेंगा दिखाते हुए अवैध खनन का काला कारोबार फल-फूल रहा है। ताजा मामला वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के ग्राम भगौड़ी का है, जहाँ ‘सफेदपोशों’ के संरक्षण में जेसीबी मशीनें दिन-रात धरती का सीना चीर रही हैं। उत्तर नर्सरी के पास धड़ल्ले से हो रहे इस अवैध खनन ने न केवल पर्यावरण को चोट पहुँचाई है, बल्कि क्षेत्रीय जनता का जीना मुहाल कर दिया है।
यमराज बनकर दौड़ रहे डंपर, धूल में दफन हो रहे राहगीर
अवैध खनन में लगी गाड़ियाँ और डंपर सड़कों पर किसी ‘स्पीड थ्रिलर’ फिल्म की तरह दौड़ रहे हैं। तेज रफ्तार गाड़ियों के कारण उड़ने वाली धूल ने राहगीरों का दम घोंट दिया है। भगौड़ी गांव और आसपास के लोगों का कहना है कि इन डंपरों की रफ्तार इतनी अधिक होती है कि सड़क पर चलना मौत को दावत देने जैसा है। शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं, जिससे साफ झलकता है कि खनन माफियाओं के हौसले बुलंद क्यों हैं।
प्रशासन मौन या मिलीभगत?
सवाल यह उठता है कि क्या वाल्टरगंज पुलिस और खनन विभाग को इस तांडव की भनक नहीं है? नर्सरी जैसी संवेदनशील जगह के पास मशीनों का गर्जना और भारी वाहनों का रेला निकलना, बिना ‘ऊपर’ की सेटिंग के मुमकिन नहीं दिखता। राहगीर परेशान हैं, सड़कें टूट रही हैं, लेकिन प्रशासन की चुप्पी माफियाओं के लिए ‘मौन सहमति’ का काम कर रही है।
मुख्य बिंदु: जो व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं
- नियमों की धज्जियाँ: बिना परमिट और मानकों को ताक पर रखकर रात-दिन चल रही हैं जेसीबी मशीनें।
- जानलेवा रफ्तार: मिट्टी लदी गाड़ियाँ आबादी वाले इलाकों में बेलगाम दौड़ रही हैं, जिससे बड़ी दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है।
- नष्ट होती सड़कें: ओवरलोडेड गाड़ियों ने गांव की संपर्क सड़कों को गड्ढों में तब्दील कर दिया है।
अगर जल्द ही इस अवैध खनन पर लगाम नहीं लगाई गई, तो वह दिन दूर नहीं जब कोई बड़ा हादसा क्षेत्र में जनाक्रोश का कारण बनेगा। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस ‘पीले पंजे’ पर नकेल कसता है या माफिया इसी तरह कानून की धज्जियाँ उड़ाते रहेंगे।









