बस्ती में ‘हरे’ का कत्लेआम: वन माफियाओं ने नगर थाने की नाक के नीचे चबा ली हरियाली!
कुंभकर्णी नींद में वन विभाग: अगई भगाड़ में गरजी मशीनें, क्या 'सुविधा शुल्क' से बंद हुई जिम्मेदार की आंखें?
अजीत मिश्रा (खोजी)
🌲बस्ती में ‘खाकी’ और ‘खादी’ की चुप्पी के बीच कत्लेआम: अगई भगाड़ में गरजी मशीनें, जमींदोज हुए दर्जनों फलदार वृक्ष🌲
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- पर्यावरण का सीना छलनी: रक्षक बने भक्षक? पुलिस और वन विभाग की शह पर गिरे दर्जनों फलदार वृक्ष!
- योगी सरकार के अभियान को बस्ती में पलीता: कागजों पर वृक्षारोपण, जमीन पर फलदार पेड़ों का सफाया!
- अगई भगाड़ में ‘आरा’ तंत्र का राज: जिम्मेदारों की मूक सहमति से धराशायी हुए दर्जनों हरे पेड़।
- साहब सो रहे, माफिया ढो रहे: नगर थाना क्षेत्र में मशीनों से हो रही पेड़ों की कटाई, पुलिस बेखबर!
बस्ती: माफियाओं के हाथ में आरा, प्रशासन का मौन सहारा! नगर थाना क्षेत्र बना माफियाओं की चारागाह: कटे दर्जनों फलदार वृक्ष। मिलीभगत का खेल: अगई भगाड़ में पर्यावरण पर प्रहार!
बस्ती। प्रदेश सरकार एक तरफ ‘वृक्षारोपण जन अभियान’ चलाकर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं दूसरी तरफ बस्ती जिले के नगर थाना अंतर्गत अगई भगाड़ में वन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। यहाँ प्रशासन की नाक के नीचे फलदार वृक्षों पर बेखौफ आरा चलाया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं।
मशीनों की गूंज और तंत्र की खामोशी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अगई भगाड़ में पिछले कई घंटों से प्रतिबंधित और फलदार पेड़ों की धड़ल्ले से कटाई की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि यह कोई छुप-छुपाकर किया जाने वाला काम नहीं है; बाकायदा मशीनें लगाकर पर्यावरण का सीना छलनी किया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या वन विभाग और स्थानीय पुलिस को इन मशीनों की गूंज सुनाई नहीं दे रही? या फिर “सुविधा शुल्क” के खेल ने तंत्र के कान और आंख दोनों बंद कर दिए हैं?
मिलीभगत का ‘हरा’ खेल?
स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि बिना किसी डर के दर्जनों फलदार पेड़ धराशायी कर दिए गए। चर्चा आम है कि वन विभाग और स्थानीय पुलिस की कथित मिलीभगत के बिना इतना बड़ा खेल संभव नहीं है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो पर्यावरण को बचाएगा कौन?
बड़ा सवाल: क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों को बस्ती का यह तंत्र ठेंगा दिखा रहा है? क्या इन हरे पेड़ों की बलि देने वाले माफियाओं पर गैंगेस्टर जैसी कार्रवाई होगी, या मामला कागजों में दबा दिया जाएगा?
मुख्य बिंदु:
- स्थान: अगई भगाड़, थाना- नगर, बस्ती।
- वारदात: मशीनों द्वारा फलदार वृक्षों की अवैध कटाई।
- आरोप: वन विभाग और पुलिस की संदिग्ध भूमिका।
- असर: पर्यावरण को भारी क्षति और सरकार के अभियान को पलीता।
अब देखना यह है कि इस रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन और उच्चाधिकारी क्या संज्ञान लेते हैं, या फिर अगई भगाड़ की हरियाली इसी तरह माफियाओं की भेंट चढ़ती रहेगी।









