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मेहदावल में जिस्मफरोशी का पर्दाफाश: स्कूल ड्रेस में लड़कियों का आना-जाना, समाज के माथे पर कलंक!

मेहदावल का 'घिनौना' अड्डा: स्पा सेंटर की आड़ में नाबालिगों की बलि का खेल! पुलिस की रेड या अपराधियों को 'अलर्ट' का खेल? मेहदावल में रसूखदारों की शह पर देह व्यापार!

अजीत मिश्रा (खोजी)

मेहदावल में ‘जिस्मफरोशी’ का अड्डा: क्या पुलिस की रेड केवल दिखावा है या रसूखदारों को बचाने की तैयारी?

संपादकीय

  • एसपी का एक्शन हुआ ‘लीक’, मौके से फरार हुए अपराधी! मेहदावल प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा था गंदा धंधा।
  • क्या अब मेहदावल में सुरक्षित हैं बेटियाँ? स्पा सेंटर की आड़ में चल रहे ‘अवैध धंधे’ पर फूटा जनता का गुस्सा!
  • मेहदावल में अनैतिक कार्यों का अड्डा: क्या पुलिस की कार्रवाई सिर्फ दिखावा बनकर रह जाएगी?
  • नौदरी में स्पा सेंटर की आड़ में सेक्स रैकेट का खुलासा, पुलिस की तत्परता पर उठे सवाल।
  • मेहदावल में गंदे धंधे का भंडाफोड़: स्थानीय लोगों के आक्रोश के बाद पुलिस का बड़ा एक्शन।

​संतकबीरनगर जिले का मेहदावल क्षेत्र इन दिनों एक बेहद घिनौनी और शर्मनाक घटना को लेकर चर्चा में है। नौदरी इलाके में संचालित एक स्पा सेंटर और होटल ने उस ‘संस्कृति’ को नंगा कर दिया है, जिसे हम सभ्य समाज कहते हैं। स्पा के नाम पर यहाँ चल रहा अनैतिक देह व्यापार का गोरखधंधा कोई छिपी बात नहीं थी, लेकिन सवाल यह है कि यह गंदा खेल आखिर किसकी शह पर फल-फूल रहा था?

नाबालिगों की आह और रसूखदारों की मौज

​सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यहाँ स्कूल ड्रेस में नाबालिग लड़कियों का आना-जाना बना हुआ था। क्या हम ऐसे समाज की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ हमारी आने वाली नस्लें चंद पैसों की हवस की भेंट चढ़ जाएंगी? स्थानीय लोगों का आक्रोश जायज है, क्योंकि वे अपनी आंखों के सामने अपने मोहल्ले को ‘अनैतिकता का केंद्र’ बनते देख रहे थे।

एसपी का ‘एक्शन’ बनाम व्यवस्था की ‘लीकेज’

​पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीणा ने जैसे ही इस मुद्दे का संज्ञान लिया, एक सकारात्मक उम्मीद जगी। छापेमारी हुई, हलचल मची और अपराधियों में हड़कंप भी दिखा। लेकिन, यहाँ एक बड़ा ‘मगर’ खड़ा होता है।

​जनता पूछ रही है कि जब पुलिस रात 9 बजे रेड करने पहुंची, तो वह स्पा सेंटर जो अक्सर देर रात तक गुलजार रहता था, ठीक 8 बजे क्यों बंद हो गया? क्या यह محض एक इत्तेफाक था, या फिर वर्दी के भीतर बैठे किसी ‘मुखबिर’ ने संचालकों को पहले ही सचेत कर दिया था? अगर रेड की भनक संचालकों को लग गई, तो यह पुलिस महकमे के भीतर मौजूद उस ‘सड़े हुए तंत्र’ की ओर इशारा करता है, जो अपराधियों को बचाने का काम करता है।

दिखावे की कार्रवाई नहीं, नजीर चाहिए

​सिर्फ ताला बंद कर देना या औपचारिकता पूरी कर लेना ही समाधान नहीं है। मेहदावल के इस ‘गंदे अड्डे’ के पीछे किसका हाथ है? क्या संचालक के पास रसूख है, या किसी राजनीतिक संरक्षण की छतरी ने उन्हें अब तक बचाए रखा था?

​पुलिस अधीक्षक को अब अपनी ही टीम के उन लोगों की भी जांच करनी चाहिए जिनकी वजह से अपराधी को छापेमारी की सूचना मिली। यदि वाकई इस क्षेत्र को अपराधमुक्त बनाना है, तो केवल छापेमारी काफी नहीं है—असली दोषियों को सलाखों के पीछे डालकर उन्हें ऐसी सजा देनी होगी कि दोबारा कोई भी स्पा या होटल के नाम पर जिस्म का व्यापार करने की जुर्रत न करे।

मेहदावल की जनता जाग चुकी है। अब बारी पुलिस प्रशासन की है कि वह यह साबित करे कि वे आम आदमी के रक्षक हैं, न कि स्पा संचालकों की दलाली करने वाले।

क्या आपको लगता है कि इस छापेमारी के बाद भी यह खेल पूरी तरह बंद हो जाएगा, या कुछ समय बाद फिर से ‘नए नाम’ के साथ वही धंधा शुरू हो जाएगा?

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