बस्ती में ‘मिट्टी माफिया’ का राज: बिना परमिशन चल रहा मौत का खेल, प्रशासन मौन
सोनहा में कानून को 'खुली चुनौती': माफियाओं के आगे नतमस्तक क्यों है प्रशासन? सोनहा की सड़कों पर मौत का तांडव: नाबालिग चला रहे डंपर, जिम्मेदारों की चुप्पी संदिग्ध
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: सोनहा में ‘मिट्टी माफिया’ का तांडव, प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
- बस्ती: अवैध खनन से बदहाल सड़कें, माफियाओं के हौसले बुलंद
- अमरोली-सोमाली में दिन-रात जारी अवैध खनन, ग्रामीणों की जान पर आफत
- बिना लाइसेंस, बिना परमिट: सोनहा में बेखौफ दौड़ रहे मौत के सौदागर
ब्यूरो, बस्ती: बस्ती जिले का सोनहा थाना क्षेत्र इन दिनों कानूनविहीन इलाके में तब्दील हो चुका है। यहां ‘मिट्टी माफियाओं’ ने नियम-कानूनों को ताक पर रखकर अवैध खनन का ऐसा खेल शुरू किया है, जो न केवल सरकारी राजस्व को चूना लगा रहा है, बल्कि आम नागरिकों की जान के लिए भी बड़ा खतरा बन चुका है।
दिन-दहाड़े सीना छलनी कर रही जेसीबियां
अमरोली-सोमाली क्षेत्र में अवैध खनन का कारोबार अपने चरम पर है। बिना किसी परमिट या अनुमति के, दिन हो या रात, जेसीबी मशीनें बेखौफ होकर जमीन का सीना चीर रही हैं। यहां से निकली मिट्टी को डंपरों के जरिए करीमनगर की तरफ ढोया जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर पुलिस और खनन विभाग की नाक के नीचे यह अवैध कारोबार कैसे फल-फूल रहा है? क्या माफियाओं को किसी का संरक्षण प्राप्त है?
मौत बनकर दौड़ते डंपर, नाबालिग हाथों में स्टयरिंग
सबसे भयावह पहलू यह है कि इन भारी-भरकम डंपरों को चलाने वाले कई चालकों की उम्र अभी गाड़ी चलाने की नहीं है। सूत्रों की मानें तो कई नाबालिग बिना ड्राइविंग लाइसेंस के इन भारी वाहनों को तेज रफ्तार में सड़कों पर दौड़ा रहे हैं। यह स्थिति कभी भी किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। डंपरों की इस अंधाधुंध रफ्तार के कारण बुजुर्गों, बच्चों और स्कूली छात्रों के लिए सड़क पर चलना तक दूभर हो गया है।
टूटती सड़कें, बढ़ता आक्रोश
लगातार भारी वाहनों के दबाव से ग्रामीण सड़कें पूरी तरह टूटकर बिखर चुकी हैं। जगह-जगह गड्ढों में तब्दील हो चुकी इन सड़कों पर चलना राहगीरों के लिए किसी सजा से कम नहीं है। धूल और मिट्टी के गुबार से ग्रामीणों का जीना मुहाल हो गया है, लेकिन जिम्मेदारों को शायद जनता की परेशानी से कोई लेना-देना नहीं है।
प्रशासन की चुप्पी संदिग्ध
अवैध खनन के इस पूरे प्रकरण पर स्थानीय प्रशासन की चुप्पी कई बड़े सवाल खड़े कर रही है। जब जनता त्राहि-त्राहि कर रही है, तब जिम्मेदार अधिकारियों का कुंभकर्णी नींद में सोना उनकी मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
क्या बस्ती प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? या फिर तब कार्रवाई होगी जब कोई मासूम इन तेज रफ्तार डंपरों का शिकार बन जाएगा? अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन इस अराजकता पर लगाम लगाता है या माफियाओं का यह खेल यूं ही बदस्तूर जारी रहेगा।









