बस्ती में ‘रेत का साम्राज्य’: खनन माफियाओं के आगे नतमस्तक प्रशासन, ग्रामीणों की निजी जमीन पर डाका
कलवारी में अवैध खनन का तांडव: 20 फीट गहरे गड्ढे, खतरे में बांध और ग्रामीणों पर फर्जी मुकदमों का 'प्रहार' सरकारी फाइलों में बंद खदान, धरातल पर अवैध लूट; बस्ती के खनन माफियाओं को किसका है 'अदृश्य संरक्षण'?
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती में ‘रेत का साम्राज्य’: अवैध खनन माफियाओं के आगे नतमस्तक प्रशासन, ग्रामीणों की भूमि पर डाका
- बस्ती: खनन विभाग और माफियाओं की ‘गहरी साठगांठ’ का सच, ग्रामीणों की गुहार पर मौन क्यों प्रशासन?
- अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाने पर FIR: क्या बस्ती में कानून माफियाओं की जेब में है?
बस्ती। जिले के कलवारी थाना क्षेत्र में कानून का इकबाल खत्म होता दिख रहा है। यहाँ ‘मांझा खुर्द डिंगरापुर’ में खनन माफियाओं ने अवैध बालू खनन का ऐसा जाल बुना है कि अब यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि ग्रामीणों की जान-माल के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस खेल ने विभागीय साठगांठ की पोल खोल दी है।

खेतों को बनाया ‘गहरा गड्ढा’, बांध पर मंडराया संकट
खनन माफियाओं की दबंगई का आलम यह है कि उन्होंने स्वीकृत पट्टे की सीमा को दरकिनार कर ग्रामीणों की निजी भूमि को अपना कार्यक्षेत्र बना लिया है। गाटा संख्या 1164क/73 पर बीते 12 मार्च से जारी खुदाई में खेतों से 20 फीट गहरी बालू निकाल ली गई है। हैरानी की बात यह है कि यह खनन स्थल नदी के मुख्य बांध से मात्र 500 मीटर की दूरी पर है। यदि समय रहते इस पर लगाम नहीं कसी गई, तो आने वाले बरसात के दिनों में यह क्षेत्र भीषण कटाव और तबाही की चपेट में आ सकता है।
बंद खदान, फिर भी धड़ल्ले से जारी ‘सफेदपोश’ लूट
कागजों में खदान 15 जून 2026 से बंद है और सरकारी खजाने में एक पैसे की रॉयल्टी नहीं जा रही, फिर भी धरातल पर अवैध बालू का कारोबार पूरे शबाब पर है। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन निरीक्षक का फोन न उठाना और शिकायतों को नजरअंदाज करना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि इस ‘खेल’ में विभाग के अधिकारियों का पूरा संरक्षण प्राप्त है। बिना उच्च अधिकारियों की मिलीभगत के, खदान बंद होने के बावजूद बालू का लदान असंभव है।
विरोध की आवाज दबाने के लिए दर्ज करा रहे फर्जी मुकदमे
खनन माफियाओं का हौसला इतना बुलंद है कि जो भी ग्रामीण अपनी जमीन बचाने के लिए आवाज उठाता है, उसे ही अपराधी घोषित करने की साजिश रची जा रही है। 16 जून 2026 को ग्रामीणों पर दर्ज कराया गया मारपीट का फर्जी मुकदमा इसी दबंगई का एक हिस्सा है। माफियाओं का सीधा एजेंडा है—’खनन करो, लूटो और विरोध करने वालों को कानूनी शिकंजे में फंसा दो।’
क्या जिला प्रशासन करेगा ‘निष्पक्ष’ कार्रवाई?
पीड़ित मनीष सिंह और ग्राम प्रधान राममूर्ति ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई है कि इस मामले की जांच जिला खनन अधिकारी से न कराई जाए, क्योंकि उनकी निष्पक्षता संदेह के घेरे में है। ग्रामीणों ने इस पूरे प्रकरण की जांच उपजिलाधिकारी (सदर) या अपर जिलाधिकारी से कराने की मांग की है।
सवाल यह है कि क्या बस्ती प्रशासन अपनी साख बचा पाएगा? क्या माफियाओं के संरक्षण में चल रहे इस अवैध कारोबार को बंद कर ग्रामीणों को न्याय मिलेगा, या फिर यह ‘रेत का साम्राज्य’ प्रशासन की मौन स्वीकृति के साथ इसी तरह फल-फूलता रहेगा?














