सफाई के नाम पर लूट: बस्ती पालिका के 55 वाहनों के तेल में लाखों का घोटाला
बस्ती की जनता टैक्स देती है ताकि शहर साफ-सुथरा रहे, सड़कें चमकें। उस टैक्स के पैसे से डीजल-पेट्रोल के नाम पर अगर जेबें भरी जा रही हैं, तो यह जनता के पसीने की लूट है।
“बस्ती नगर पालिका: सफाई के नाम पर 18 लाख महीने का ईंधन घोटाला, जब आखिरी लूट समझ कर लूट रहे हैं साहब”
- नगर पालिका नहीं, भ्रष्टाचार का अड्डा – तेल चोरी से खुली पोल
- अध्यक्ष और EO के नाम पर पर्ची जमा, चालकों को धमकी – बस्ती पालिका में कौन है तेल माफिया?
- 18 लाख का सवाल: बस्ती का कचरा उठ रहा है या जेबें भरी जा रही हैं? 8. पूरी नगर पालिका भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबी, अब तेल में भी सेंध
बस्ती नगर पालिका परिषद आज भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबी हुई है। नाली, खड़ंजा, स्ट्रीट लाइट, जलभराव तो पुराने मुद्दे थे, अब तो सफाई के लिए चलने वाले वाहनों के तेल में भी लाखों का खेल शुरू हो गया है। सवाल लाजमी है – क्या पालिका में बैठे जिम्मेदार समझ चुके हैं कि दोबारा मौका मिलने वाला नहीं है, इसलिए जितना लूट सको उतना लूट लो?
नगर पालिका में सफाई व्यवस्था के लिए लगभग 55 वाहन संचालित हैं – ट्रैक्टर, जेसीबी, ट्रक, मैजिक, कॉम्पैक्ट और ऑटो। इनको चलाने के लिए अधिकृत पेट्रोल पंप की ईंधन पर्चियां जारी होती हैं। आरोप बेहद गंभीर है। अधिकारियों द्वारा हर माह वाहनों के लिए जारी होने वाली तेल की पर्चियों में हेराफेरी कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। इस पूरे मामले में प्रतिमाह करीब 18 लाख रुपये के ईंधन खर्च पर सवाल उठे हैं।
सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि यह आरोप बाहर से नहीं, अंदर से आ रहा है।
वाहन चालकों ने लगाए गंभीर आरोप –
कुछ वाहन चालकों का आरोप है कि हर महीने एक ईंधन पर्ची सफाई इंस्पेक्टर अपने पास रख लेते हैं। आरोप है कि इस दौरान अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी (ईओ) का नाम लेकर पर्ची जमा कराई जाती है। विरोध करने पर वाहन हटाने या अन्य कार्रवाई की धमकी दी जाती है, जिसके चलते अधिकांश कर्मचारी खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं।
सोचिए, जो चालक सुबह 5 बजे कचरा उठाने निकलता है, उसे भी डरा कर, धमका कर चुप करा दिया जाता है। एक पर्ची का मतलब – एक वाहन का पूरे महीने का तेल। यानी 55 वाहनों पर 55 पर्चियों का सीधा घोटाला।
यह कोई छोटा-मोटा गड़बड़झाला नहीं है। यह संगठित लूट है।
सवाल जो नगर पालिका को जवाब देना होगा –
1. जब 55 वाहनों का लॉगबुक, जीपीएस और रूट चार्ट मौजूद है, तो 18 लाख का तेल महीने में कहाँ जल रहा है? क्या बस्ती के वाहन बस्ती से दिल्ली तक सफाई करने जाते हैं? 2. सफाई इंस्पेक्टर के पास पर्ची रोकने का कौन सा अधिकार है? और यदि वह अध्यक्ष और ईओ के नाम पर पर्ची जमा करा रहा है, तो क्या अध्यक्ष और ईओ को इसकी जानकारी नहीं है, या जानकारी होते हुए भी हिस्सेदारी है? 3. चालकों को धमकी कौन दे रहा है और किसके संरक्षण में दे रहा है?
बस्ती की जनता टैक्स देती है ताकि शहर साफ-सुथरा रहे, सड़कें चमकें। उस टैक्स के पैसे से डीजल-पेट्रोल के नाम पर अगर जेबें भरी जा रही हैं, तो यह जनता के पसीने की लूट है।
आज जरूरत है कि जिलाधिकारी बस्ती इस पूरे मामले का संज्ञान लें। 55 वाहनों के पिछले 1 साल की पर्चियों, पेट्रोल पंप के सीसीटीवी और स्टॉक रजिस्टर का मिलान कराया जाए। दूध का दूध और पानी का पानी एक दिन में हो जाएगा।
नगर पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनके नाम का इस्तेमाल कौन कर रहा है। अगर इस्तेमाल हो रहा है और वे चुप हैं, तो मौन स्वीकृति ही माना जाएगा।
बस्ती की जनता अब सब समझती है। यह अंतिम समय की लूट बंद होनी चाहिए।




















