
समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
गडचिरोली के जिला परिषद स्कूलों में शिपाई पद की फर्जी भर्ती विज्ञापन वायरल होने का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि अब उससे भी बड़ा धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। जिला परिषद के नाम पर एक व्यक्ति को सीधे शिपाई पद का फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिया गया। इस घटना से जिला परिषद के साथ-साथ पूरे प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुहास गाडे ने बताया कि इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है।
पहले आया था 22 हजार की तनख्वाह का फर्जी विज्ञापन
इससे पहले सोशल मीडिया पर जिला परिषद स्कूलों में परिचर यानी शिपाई पद के लिए 22 हजार रुपये मासिक वेतन पर भर्ती होने का फर्जी विज्ञापन वायरल हुआ था। तब जिला प्रशासन ने तुरंत स्पष्टीकरण देकर कहा था कि यह विज्ञापन पूरी तरह झूठा और भ्रामक है। कोई भी भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं है। लोगों से अपील की गई थी कि ऐसी अफवाहों पर भरोसा न करें।
अब सीधे फर्जी नियुक्ति पत्र थमाया
लेकिन यह मामला शांत होने से पहले ही अब एक उम्मीदवार को जिला परिषद, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और चयन समिति के नाम पर कांट्रैक्ट शिपाई पद का फर्जी नियुक्ति पत्र दे दिया गया।
इस फर्जी आदेश में मुख्य कार्यकारी अधिकारी और अन्य अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर, सील, नियुक्ति की शर्तें और कार्यालयीन पत्र का पूरा फॉर्मेट हूबहू कॉपी किया गया है। इतना ही नहीं, संबंधित उम्मीदवार को एक तय तारीख पर काम पर ज्वाइन करने के निर्देश भी दिए गए थे।
प्रशासन की साख पर सवाल
इस घटना से सिर्फ बेरोजगार युवाओं के साथ धोखाधड़ी ही नहीं हो रही, बल्कि सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं। CEO सुहास गाडे ने नियुक्ति पत्र को पूरी तरह फर्जी बताया और कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामले की गहन जांच की जा रही है।
गडचिरोली में लगातार बढ़ रहे फर्जीवाड़े
गडचिरोली में पिछले कुछ दिनों में फर्जी दस्तावेजों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हाल ही में जिला कलेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर से खनिज निधि की प्रशासनिक मंजूरी का आदेश बनाने का मामला पूरे राज्य में चर्चा में रहा। उससे पहले गडचिरोली के धान घोटाले से जुड़ा फर्जी पत्र कांग्रेस नेता और विधायक नाना पटोले के फर्जी हस्ताक्षर के साथ मंत्रालय में पेश किया गया था।
अब फर्जी भर्ती विज्ञापन और सीधे फर्जी नियुक्ति आदेश के सामने आने से सवाल उठ रहा है कि गडचिरोली में फर्जी दस्तावेजों का नेटवर्क कितना गहरा है। लगातार हो रही इन घटनाओं से न सिर्फ प्रशासन बल्कि पुलिस के सामने भी फर्जी दस्तावेज बनाने वाली टोलियों का पता लगाकर उन पर रोक लगाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।











