बस्ती: एसपी डॉ. यशवीर सिंह के आदेश को ठेंगा दिखा रहे कप्तानगंज थानाध्यक्ष आलोक कुमार श्रीवास्तव!
यह घटना साफ दर्शाती है कि कप्तानगंज थानाध्यक्ष आलोक कुमार श्रीवास्तव शासन की मंशा और पुलिस अधीक्षक के निर्देशों को ठेंगा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस तीखे खुलासे और मनमानी के बाद पुलिस के उच्च अधिकारी इस लापरवाह थानाध्यक्ष पर क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर गरीबों की चीखें यूं ही थाने की चारदीवारी के भीतर दम तोड़ती रहेंगी।
अजीत मिश्रा (खोजी)
खाकी की हठधर्मिता या कानून का मखौल? बस्ती में एसपी के आदेश को ठेंगा दिखा रहे कप्तानगंज थानाध्यक्ष!
- दुबौला चौकी क्षेत्र के मदनपुरा गांव का मामला: मारपीट से पीड़ित गरीब परिवार सुबह से भूखा-प्यासा थाने में बैठा, लेकिन नहीं दर्ज हुआ मुकदमा।
- कप्तानगंज थाने में कानून का मखौल: जिले के मुखिया के फोन पर दिए गए सख्त निर्देशों के बावजूद थानाध्यक्ष द्वारा लगातार की जा रही हीला-हवाली।
- न्याय की आस में दर-दर भटक रहा असहाय परिवार: जब एसपी के आदेश पर भी नहीं मिली सुनवाई, तो आम जनता कहां जाए— बड़ा सवाल।
बस्ती: प्रदेश सरकार भले ही थानों में जनता की सुनवाई और त्वरित न्याय के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन बस्ती जिले में कुछ जिम्मेदार अधिकारी ही इन दावों की धज्जियां उड़ाने में जुटे हैं। ताजा मामला कप्तानगंज थाना क्षेत्र के दुबौला चौकी अंतर्गत ग्राम पंचायत मदनपुरा का है, जहां एक गरीब और असहाय पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। हद तो तब हो गई जब पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. यशवीर सिंह के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद थानाध्यक्ष आलोक कुमार श्रीवास्तव ने मुकदमा दर्ज करने से इंकार करते हुए पीड़ित परिवार को घंटों थाने में भूखे-प्यासे बैठाए रखा।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम पंचायत मदनपुरा में हाल ही में हुई मारपीट की एक घटना ने कानून-व्यवस्था की पोल खोल दी है। दबंगों के शिकार हुए पीड़ित परिवार ने जब न्याय की आस में तेज-तर्रार पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह का दरवाजा खटखटाया, तो एसपी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल संज्ञान लिया।
सूत्रों और आरोपों के मुताबिक, एसपी ने फोन पर सीधे कप्तानगंज थानाध्यक्ष आलोक कुमार श्रीवास्तव को निर्देश दिया कि पीड़ित परिवार की शिकायत पर तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाए। साथ ही, पीड़ित परिवार को भी निर्देशित किया गया कि वे तुरंत कप्तानगंज थाने पहुंचें।
एसपी के आदेश की सरेआम अवहेलना
पुलिस अधीक्षक के आदेश का पालन करते हुए पीड़ित परिवार दोपहर से ही कप्तानगंज थाने पर जा पहुंचा। उन्हें उम्मीद थी कि जिले के मुखिया के आदेश के बाद अब उन्हें न्याय मिल जाएगा और आरोपियों पर कानूनी शिकंजा कसेगा।
लेकिन, कप्तानगंज थानाध्यक्ष आलोक कुमार श्रीवास्तव और थाने के अन्य पुलिसकर्मियों की कार्यशैली ने सारे अरमानों पर पानी फेर दिया। थानाध्यक्ष ने एसपी के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए मुकदमा दर्ज करने में हीला-हवाली शुरू कर दी।
न्याय की आस में भूखा-प्यासा बैठा परिवार
एक तरफ जहां पीड़ित परिवार अपने साथ हुए अन्याय की पीड़ा झेल रहा है, वहीं दूसरी तरफ खाकी की बेरुखी ने उनके जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। गरीब और असहाय होने के कारण यह परिवार सुबह से भूखा-प्यासा थाने के फर्श पर न्याय की भीख मांगता बैठा रहा, लेकिन थानाध्यक्ष का दिल नहीं पसीजा।
बड़े सवाल: जब मुखिया के आदेश का यह हाल, तो आम आदमी कहां जाए?
यह मामला सिर्फ एक थाने की लापरवाही का नहीं, बल्कि व्यवस्था पर एक गंभीर सवालिया निशान है:
- क्या बस्ती पुलिस में अब थाना प्रभारियों पर एसपी के आदेशों का भी असर नहीं होता?
- क्या गरीब और असहायों की सुनवाई सिर्फ कागजी विज्ञापनों तक ही सीमित है?
- जब जिले के कप्तान का आदेश थानेदार सरेआम हवा में उड़ा दें, तो आम जनता अपनी फरियाद लेकर आखिर किसके पास जाए?
यह घटना साफ दर्शाती है कि कप्तानगंज थानाध्यक्ष आलोक कुमार श्रीवास्तव शासन की मंशा और पुलिस अधीक्षक के निर्देशों को ठेंगा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस तीखे खुलासे और मनमानी के बाद पुलिस के उच्च अधिकारी इस लापरवाह थानाध्यक्ष पर क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर गरीबों की चीखें यूं ही थाने की चारदीवारी के भीतर दम तोड़ती रहेंगी।















