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भगवान श्री बंशीधर की नगरी में जन्माष्टमी की धूम, 4 सितंबर को होगा भव्य आयोजन

32 मन स्वर्ण निर्मित श्रीकृष्ण की अलौकिक प्रतिमा है श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र, 29 अगस्त से 5 सितंबर तक श्रीमद्भागवत कथा

संवाददाता अखिलेश विश्वकर्मा ✅ श्री बंशीधर नगर। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और आस्था की नगरी श्री बंशीधर नगर में जन्माष्टमी को लेकर धार्मिक उत्साह चरम पर पहुंचने लगा है। स्थानीय बंशीधर मंदिर में विराजमान भगवान श्री बंशीधर की भव्य प्रतिमा के दर्शन के लिए वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष रौनक देखने को मिलती है।768 512 19587130 thumbnail 16x9 jhpalshribanshidharnagar asperaमंदिर में स्थापित भगवान श्रीकृष्ण की 32 मन स्वर्ण निर्मित अलौकिक प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। प्रतिमा की भव्यता और दिव्यता को देखकर दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि भगवान श्री बंशीधर के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना अवश्य पूरी होती है।

रानी शिवानी कुंवर को स्वप्न में मिले थे भगवान

धार्मिक मान्यता के अनुसार नगर ऊंटारीगढ़ के महाराजा स्वर्गीय भवानी सिंह की पत्नी रानी शिवानी कुंवर को भगवान श्रीकृष्ण ने स्वप्न में दर्शन दिए थे। भगवान के निर्देश के बाद रानी शिवानी कुंवर ने कनहर नदी के किनारे स्थित शिव पहाड़ी, उत्तर प्रदेश से भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को नगर ऊंटारी लाने का निर्णय लिया।GridArt 20260831 184936760

बताया जाता है कि रानी शिवानी कुंवर की इच्छा भगवान की प्रतिमा को राजमहल में स्थापित करने की थी, लेकिन भगवान श्री बंशीधर की लीला कुछ और थी। प्रतिमा राजमहल के बाहर, राजमहल के समीप स्थापित हुई और बाद में उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया। श्रद्धालु इसे भगवान की इच्छा और उनकी अद्भुत लीला मानते हैं।

भगवान की इच्छा से बनी बंशीधर नगर की पहचान

भगवान श्री बंशीधर के प्रति रानी शिवानी कुंवर की असीम कृष्ण भक्ति का परिणाम माना जाता है कि आज नगर ऊंटारी की पहचान श्री बंशीधर नगर के रूप में है। भगवान श्री बंशीधर की नगरी में देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं और दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

29 अगस्त से शुरू हुई भागवत कथा

जन्माष्टमी को लेकर बंशीधर मंदिर परिसर में एक सप्ताह पूर्व से ही धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं। इस दौरान श्रीमद्भागवत कथा, प्रवचन एवं रासलीला का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष 29 अगस्त से श्रीमद्भागवत कथा शुरू हुई है, जो 5 सितंबर तक चलेगी। वहीं 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूरे धूमधाम के साथ मनाई जाएगी।

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जन्माष्टमी के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने की संभावना है। मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल के बीच भगवान श्री बंशीधर का विशेष पूजन-अर्चन और दर्शन होगा। शहर में भी जन्माष्टमी को लेकर उत्साह का माहौल है।

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