
चित्रांश समाज ने भगवान चित्रगुप्त का किया अराधना

आरा/उदवंतनगर। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भैया दूज पारंपरिक तरीके से मनाया गया। बहनों ने भाइयों के लंबी आयु व शत्रु नाश को लेकर पहले श्राप दिया फिर आशिर्वाद।वहीं चित्रांश समाज द्वारा मनुष्य के कर्मों का लेखा-जोखा करने वाले भगवान चित्रगुप्त की पूजा अर्चना धूमधाम से किया गया। इसमें कायस्थ समाज ने कलम दवात व खाता बही का पूजन किया तथा भगवान चित्रगुप्त से मनोवांछित फल की कामना किया। आज की पूजा में परिवार के सभी सदस्य पूरे मनोयोग से चित्रगुप्त पूजा में जुटे रहे। उदवंतनगर में विभावरी शिक्षा निकेतन में चित्रगुप्त पूजा पारंपरिक तरीके से मनाई गई।आज के दिन कायस्थ समाज कागज कलम से दूर रहे। वहीं रविवार को अहले सुबह भैया दूज के अवसर पर ग्रामीण क्षेत्र में सुख व समृद्धि को आमंत्रण देने के पूर्व दलिदर (दरिद्रता) खदेड़ा गया। हसुआ से सूप पीटते महिलाऐं कहती सुनी गई इशर (ईश्वर) पैसस दलिदर भागस..।दलिदर को खदेड़ते हुए लोग गांव के बाहर किसी सार्वजनिक स्थान पर सूप को फेंक दिए। उसके बाद घर की साफ सफाई का काम शुरू हुआ।घर को धो पोंछ कर महिलाओं ने पवित्रता के साथ दलही पूड़ी, खीर व पीठा बनाए। भैया दूज के दिन पीठा खाने का विशेष महत्व है। उसके बाद बहनों ने अपने जीभ पर रेंगनी का कांटा गड़ा कर पहले भाईयों को खुब श्राप दिया तत्पश्चात महिलाओं व किशोरियों ने बजरी कूटा। गांव में एक जगह पहले गोवर का गोवर्धन व खडलीचा बहनी बनाया गया।विधि पूर्वक उनका पूजन किया गया।भाई का का शत्रु मानकर गोवर के गोवर्धन को मुसल से कूटा गया जिसमें पहले से चना डाला रहता है।सभी महिलाओं ने बजरी के बूंट चुनकर अपने भाई को शत्रु प्रदान के निमित्त बजरी का बूंट खिलाया।इस मौके पर वीणा देवी, रिंकू देवी, प्रीति पुतुल, नेहा नुपुर, मेधा माधवी, शीतल, खुशी आदि ने भाइयों की दीर्घायु की मंगल कामना की।





