

मानपुर वार्ड संख्या 47 के खांजाहापुर स्थित एक निजी होटल में सैकड़ों बुद्धिस्टों ने एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें महाबोधि महाविहार, बोधगया के प्रबंधन को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई। बैठक में आकाश लामा ने बोधगया मंदिर अधिनियम 1949 की समीक्षा की, जो वर्तमान में महाबोधि महाविहार के प्रशासन का संचालन करता है। उन्होंने इसे बौद्ध समुदाय के अधिकारों और भारतीय संविधान में निहित सिद्धांतों के खिलाफ बताया।
आकाश लामा ने कहा, “हम ऑल इंडिया बुद्धिस्ट फोरम हैं और हमें विश्वास है कि बिहार सरकार सुरक्षित और समृद्ध हाथों में है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के विकास के लिए जो उल्लेखनीय कार्य किए हैं, उससे राज्य की छवि में सकारात्मक बदलाव आया है। मुख्यमंत्री ने बोधगया, राजगीर, नालंदा के सौंदर्यकरण और पटना में बुद्ध स्मृति पार्क, बोधगया में महाबोधी सांस्कृतिक केंद्र जैसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं का कार्य आरंभ किया है, जो बौद्ध धर्म से जुड़ी स्थलों को सम्मान प्रदान करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि, “इसलिए हमें पूरा विश्वास है कि बिहार के मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने के बाद बुद्धिस्ट समुदाय को न्याय मिलेगा।”
आकाश लामा ने यह भी बताया कि, “चूंकि 1949 का बोधगया मंदिर अधिनियम बिहार सरकार द्वारा पारित है, यह विधायिका का विषय है, और हम आशा करते हैं कि बिहार के विधायक इस अधिनियम के संदर्भ में एक उचित और सौहार्दपूर्ण समाधान निकालेंगे।”
सैकड़ों बुद्धिस्टों के इस सामूहिक प्रयास से बोधगया मंदिर अधिनियम के संशोधन की दिशा में नई उम्मीदें जागी हैं, और यह समुदाय की ओर से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।









