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सहारनपुर: वेतन रुकने से नाराज कर्मचारी ने पानी की टंकी पर चढ़कर आत्मदाह का प्रयास, प्रशासन ने समय रहते काबू पाया

पिलखनी क्षेत्र के अंबाला रोड हाईवे पर स्थित शेख उल हिंद मौलाना मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को एक गंभीर घटना ने सबको हड़कंप में डाल दिया।

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सहारनपुर: वेतन रुकने से नाराज कर्मचारी ने पानी की टंकी पर चढ़कर आत्मदाह का प्रयास, प्रशासन ने समय रहते काबू पाया

सहारनपुर। पिलखनी क्षेत्र के अंबाला रोड हाईवे पर स्थित शेख उल हिंद मौलाना मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को एक गंभीर घटना ने सबको हड़कंप में डाल दिया। आगरा से ट्रांसफर होकर सहारनपुर में तैनात कर्मचारी कमल सिंह ने वेतन न मिलने और अपने साथ कथित अन्याय के विरोध में पानी की टंकी पर चढ़कर आत्मदाह का प्रयास किया। घटनास्थल पर मेडिकल कॉलेज के उच्च अधिकारी और पुलिस प्रशासन तत्काल पहुंचे और कई घंटों की समझाइश के बाद कमल सिंह को नीचे उतारा गया।

जानकारी के अनुसार, कमल सिंह कॉलेज में कुक के पद पर तैनात हैं, लेकिन यहां कुक की वैकेंसी न होने के कारण उन्हें फोर्थ क्लास की जिम्मेदारियों के तहत अन्य कार्य सौंपे गए थे। कमल सिंह का आरोप है कि पिछले सात महीनों से उनका वेतन नहीं दिया गया, और उनके बच्चे की स्कूल फीस भी बकाया रह गई। उन्होंने बताया कि आगरा में उनके प्रबंधक प्रशांत गुप्ता और सहारनपुर में कॉलेज के प्रबंधक सुधीर राठी दोस्त हैं और एक-दूसरे की सलाह पर उनके साथ शोषण किया जा रहा है।

कमल सिंह के मुताबिक, लगातार ड्यूटी करने के बावजूद उनका वेतन नहीं मिलने और अन्यायपूर्ण व्यवहार के चलते उनका मानसिक तनाव बढ़ गया था। उन्होंने कहा, “मेरे पास आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। मेरे हालात इतने खराब हैं कि मैं अपने परिवार का भरण-पोषण भी नहीं कर पा रहा हूं। प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बाद ही मैं नीचे उतरा।” इस घटना ने कर्मचारियों में मानसिक स्वास्थ्य और काम के तनाव के महत्व को उजागर किया।

हालांकि, कॉलेज प्रबंधन का पक्ष इस मामले में अलग है। प्रबंधक सुधीर राठी ने बताया कि अगस्त माह का वेतन कट गया क्योंकि कमल सिंह उस महीने केवल सात दिन उपस्थित थे और अक्सर हाजरी लगाकर चले जाते थे। उन्होंने यह भी बताया कि स्टाफ द्वारा लगातार शिकायतें मिलती रही थीं कि कमल सिंह अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करते। आगरा से ट्रांसफर के दौरान भी उनके कार्य व्यवहार को लेकर शिकायतें थीं। प्रबंधन का दावा है कि वेतन कटौती और पद पर नियुक्ति के फैसले नियमों के तहत किए गए थे।

पुलिस प्रशासन ने तत्काल स्थिति को नियंत्रित किया। मौके पर थाना पिलखनी पुलिस, कॉलेज के स्टाफ और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं में कर्मचारियों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर लाना और मानसिक समर्थन देना प्राथमिकता है। इस दौरान पुलिस ने कमल सिंह के साथ शांतिपूर्ण संवाद किया और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से देखा जाएगा।

इस घटना ने केवल व्यक्तिगत तनाव ही नहीं, बल्कि समाज पर भी गंभीर प्रभाव डालने वाले पहलुओं को सामने लाया। कर्मचारी की आत्महत्या का प्रयास, यदि समय पर रोका न जाता, तो इससे परिवार और समुदाय में गहरा शोक और सामाजिक असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती थी। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी और संस्थागत कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और वित्तीय सुरक्षा पर ध्यान न देने से मानसिक संकट और हिंसक घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

कानूनी दृष्टिकोण से देखें तो इस घटना में कोई भी नकारात्मक परिणाम न हो इसके लिए प्रशासन ने तत्काल कदम उठाए। कमल सिंह के मामले में वेतन भुगतान विवाद, कर्मचारी अधिकार, और मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे पहलुओं की जांच की जाएगी। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी कर्मचारी के साथ अनुचित व्यवहार या शोषण न हो।

इस पूरे प्रकरण ने यह स्पष्ट कर दिया कि कर्मचारियों के वेतन भुगतान में देरी और कार्यस्थल पर असंतोष केवल आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिरता को प्रभावित करता है। इस घटना के बाद प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि कमल सिंह का लंबित वेतन जल्द दिया जाएगा और भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए कड़ाई और नियमों के अनुसार निगरानी की जाएगी।

इस घटना ने सहारनपुर के सरकारी और संस्थागत कर्मचारियों के लिए चेतावनी भी दी है कि वेतन और अधिकारों से जुड़ी समस्याओं के समाधान में समय पर संवाद और उचित कार्रवाई महत्वपूर्ण है। साथ ही, प्रशासन के लिए यह संदेश भी है कि कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेना, मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना और न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित करना आवश्यक है।

कुल मिलाकर, यह घटना न केवल कमल सिंह की व्यक्तिगत कठिनाईयों को उजागर करती है, बल्कि सहमति, प्रशासनिक जवाबदेही और समाज में न्यायसंगत प्रक्रिया की अहमियत को भी सामने लाती है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई ने इस मामले में बड़े हादसे को टालने में सफलता पाई, और यह संदेश दिया कि सहारनपुर प्रशासन कर्मचारियों की सुरक्षा और अधिकारों के प्रति संवेदनशील है।

✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – समृद्ध भारत समाचार पत्र
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