
बांगरदा ( खरगोन ) – जहाँ सुमति अर्थात सद्बुद्धि है, वही सुख, समृद्धि एवं शांति है. जहाँ कुमती अर्थात दुबुद्धि है। वहाँ विपत्ति एवं दुःख ही दुःख ही है।संत का ह्रदय मक्खन के समान होता है।जो दूसरों के दुःख दर्द में उनके निवारण के लिए द्रवित हो उठता है. बिना ईश्वर की कृपा के संतो का सानिध्य नहीं मिलता है।
उक्त विचार ग्राम बांगरदा में आयोजित संत सिंगाजी की परचरी पुराण के अवसर पर कथा वाचक श्री मुकेश बाबा ( कालधा ) ने व्यक्त किये। आपने संत सिंगाजी के जीवन दर्शन एवं उनकी प्रेरणाओं पर प्रकाश डालते हुवे कहा की परहित के समान कोई धर्म नहीं है। संत सिंगाजी ने मानव कल्याण के लिए अपने सम्पूर्ण जीवन का पल -पल क्षण – क्षण नियोजित कर दिया। उनके जीवन के तप व भक्ति की शक्ति को प्राणी मात्र की सेवा में लगा दिया. जिनकी सिद्धि से आज भी प्राणी मात्र के दुखों व कष्टों का निवारण हो जाता है।
कथा के शुभारम्भ अवसर पर मुख्य यजमान रमेश करोड़ा द्वारा सपत्निक व्यास पीठ का पूजन किया गया।तत्पश्चात सुरेश करोड़ा एवं हुकुमचंद चौधरी द्वारा व्यास पीठ पर विराजित कथा वाचक मुकेश बाबा एवं संगीत टोली का मंगल तिलक एवं पुष्प वर्षा के साथ स्वागत किया गया।


समापन के अवसर पर मुख्य यजमान राधेश्याम करोड़ा,सुरेश करोड़ा,पूर्व सरपंच रमेश करोड़ा , हुकुमचंद चौधरी द्वारा समस्त संगीत मंडली के सदस्यों के साथ कथाकार मुकेश बाबा का शाल श्रीफल भेंट कर पुष्प वर्षा के साथ अभिनंदन किया।
:-रामेश्वर फूलकर पत्रकार बांगरदा






