।। बांसी में मनरेगा का ‘डिजिटल डाका’: मोबाइल की फोटो से लग रही हाजिरी, बिना काम किए उठ रहा पैसा!
फूलपुर ग्राम सभा में भ्रष्टाचार का 'नया मॉडल': सचिव और रोजगार सेवक की जुगलबंदी, कागज पर दौड़ रहा विकास।
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। भ्रष्टाचार की ‘डिजिटल’ सेंध: बांसी के फूलपुर में बिना काम किए मोबाइल से लग रही हाजिरी, सरकारी धन की खुली लूट।।
उत्तर प्रदेश
सिद्धार्थनगर (बांसी)। उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन भले ही जीरो टॉलरेंस की नीति का दम भरते हों, लेकिन बांसी ब्लॉक के ग्राम पंचायत फूलपुर में मनरेगा योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। यहाँ ‘डिजिटल इंडिया’ का एक ऐसा काला कारनामा सामने आया है, जहाँ मजदूर साइड पर पसीना बहाने के बजाय मोबाइल की स्क्रीन में ‘कैद’ होकर अपनी हाजिरी दर्ज करा रहे हैं।
तकनीक का तमाशा: मोबाइल से मोबाइल की फोटो खींचकर हाजिरी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, फूलपुर में सचिव और रोजगार सेवक की जुगलबंदी ने भ्रष्टाचार का नया ‘टेक्निकल मॉडल’ तैयार किया है। नियमतः मजदूरों को कार्यस्थल पर मौजूद रहकर फेस-कैप्चर (Face Capture) के जरिए उपस्थिति दर्ज करानी होती है, लेकिन यहाँ खेल ही निराला है। मास्टर रोल में दर्ज 49 मजदूरों की हाजिरी कथित तौर पर घर बैठे ही मोबाइल से मोबाइल के फोटो खींचकर लगाई जा रही है। जिओ-टैग (Geo-tag) फोटो में भी इस जालसाजी के निशान साफ देखे जा सकते हैं।
बिना फावड़ा चले खातों में जा रहा है पैसा
मामला सिर्फ़ हाजिरी तक सीमित नहीं है। ग्राम पंचायत फूलपुर में कार्य कोड 3151011/LD/958486255824933467 (एमएसआर संख्या: 6691) के तहत ‘वीरेन्द्र सिंह के खेत से भरवाडीह सड़क तक मिट्टी कार्य’ के नाम पर सरकारी धन की निकासी की जा रही है। आरोप है कि धरातल पर बिना कोई कार्य किए, मनरेगा का पैसा मजदूरों के खातों में हस्तांतरित किया जाता है और निकासी होते ही इसका बंदरबांट कर लिया जाता है।
डीसी मनरेगा की चुप्पी पर सवाल
सचिव की ‘मेहरबानी’ और रोजगार सेवक की इस ‘जादुई तकनीक’ ने शासन की मंशा पर पानी फेर दिया है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि आखिर इतनी बड़ी धांधली डीसी मनरेगा और उच्चाधिकारियों की नजरों से कैसे बच रही है? क्या जिम्मेदारों को इस फर्जीवाड़े की भनक नहीं है, या फिर भ्रष्टाचार की यह जड़ें ऊपर तक जुड़ी हुई हैं?
बड़ा सवाल: क्या जिला प्रशासन इस गंभीर मामले की जांच कराकर दोषी सचिव और रोजगार सेवक पर कठोर कार्यवाही करेगा, या फिर फूलपुर में मनरेगा के धन की इसी तरह ‘डिजिटल लूट’ जारी रहेगी?









